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धीरेन्द्र शास्त्री और भूपेश बघेल शास्त्रार्थ

वर्तमान सनातनी लोगों के लिए ” पंडित धीरेन्द्र शास्त्री” नाम एक ऐसे आकर्षक युवा व्यक्ति का नाम है जिसकी मुस्कान और हंसी उतनी ही पावन है जितने उनके प्रवचन प्रवाह में बिखरते शब्द है। धीरेन्द्र, पंडित भी है और शास्त्री भी, इन दिनों पंडित धीरेन्द्र शास्त्री छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में है। ये जिला इसलिए भी जाना जाता है जहां से अविभाजित मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के दो मुख्यमंत्री मोतीलाल वोरा और भूपेश बघेल निकले है। मोतीलाल वोरा का स्वर्गवास हो चुका है।भूपेश बघेल जिंदा है। उनके प्रशंसक भूपेश बघेल को कका कहते है। टाइगर अभी जिंदा है के तर्ज पर “कका अभी जिंदा है” कहा जाता है, माना जाता है और है भी। कांग्रेस का छत्तीसगढ़ में वजूद है तो भूपेश बघेल के कारण ही है उनका कहना, कांग्रेस का कहा माना जाता है। भूपेश बघेल मुखर हुए है पंडित धीरेन्द्र शास्त्री के खिलाफ।

ढोंगी पंडित कह दिए, धन बटोरने के छत्तीसगढ़ आते है कह दिए, छत्तीसगढ़ के साधु संतों से शास्त्रार्थ की चुनौती भी दे डाली, अपने पुत्र बिट्टू से छोटे होने की बात कही, हनुमान चालीसा पर बताया कि सालों से हनुमान चालीसा पढ़ रहे है। नाराज़ होकर धीरेन्द्र शास्त्री के इस कथन पर भी आपत्ति किया उनको विदेश में बस जाने के लिए सलाह न दे।भूपेश बघेल आगे ये भी कह दिए कि जब दिव्य दरबार में लोग ठीक हो रहे है तो मेडिकल कॉलेज खोलने की जरूरत क्यों है? धीरेन्द्र शास्त्री जो सनातन धर्म की पैरवी कर रहे हैं उसे भूपेश बघेल नहीं सीखना चाहते, छत्तीसगढ़ की धरती कबीर और गुरु घासीदास की विचार से जुड़ी है।अंत में जो बात जिससे विवाद धार्मिक दंगल से निकल कर राजनीति के मैदान में आ गया वह था बागेश्वर महराज ढोंगी साधु है, भाजपा के एजेंट है।

छत्तीसगढ़ के मौसम में गजब की ठंड पड़ रही है लेकिन मिजाज में गर्मी आ गई। पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री जी छत्तीसगढ़ में है।उनका अपना एजेंडा है धर्म संस्थापना, सनातन धर्म के बारे में खुल कर समर्थन करना। हिंदुत्व पर दिल खोल कर बात करते है। छत्तीसगढ़ सरकार के शासकीय विमान से आए है।स्वाभाविक है कि सनातन धर्म शासकीय रूप से हवा में उड़ान भरे तो राजनीति होने की बनती थी और बनी भी, कांग्रेस के समर्थकों ने आपत्ति जता दी।

भूपेश बघेल के समर्थन में वो “बाबा जी” भी आ गए जो ऐसे मामलों में पड़ते नहीं। बहरहाल भाजपा, कांग्रेस को जिन मुद्दों में फसाना चाहती है कांग्रेस उसमें खुद ही जाकर फंस रही है।राजनीति का कोई धर्म नहीं होता लेकिन धर्म की राजनीति में नफा नुकसान आम जनता द्वारा देखा जाता है। भाजपा खुले आम हिंदुत्व का भगवा झंडा लिए देश और राज्यो में सरकार पर सरकार बनाते जा रही है। कांग्रेस को धर्म निरपेक्ष होने की बेबसी है क्योंकि संविधान के 42वे संशोधन में प्रस्तावना में धर्म निरपेक्ष शब्द जोड़वाया है। भाजपा सुनियोजित ढंग से कांग्रेस को हिंदू धर्म, सनातन धर्म विरोधी बनाने के लिए हर संभव प्रयास करती है, इसका राजनैतिक लाभ दिख ही रहा है।बाबा साहब सनातन की लड़ाई में मुगल साम्राज्य में सुरक्षा की बात कह कर कांग्रेस की मानसिकता को बाहर ले आए।

खैर, भूपेश बघेल के पिता ब्राह्मण विरोधी थे। भूपेश बघेल कितना भी कह ले कि वे सालों से हनुमान चालीसा पढ़ रहे है लेकिन उनकी मानसिकता की कहानी कांग्रेस शासनकाल में बहुत कुछ सुना गया है। धीरेन्द्र शास्त्री से अपने पुत्र को दस साल बड़ा होना बताया लेकिन धीरेन्द्र शास्त्री की लोकप्रियता कितनी है और बिट्टू बघेल की लोक प्रियता की तुलना करे तो धीरेन्द्र शास्त्री के पासंग में बिट्टू बाबा कही नहीं बैठते है। धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री की धर्म सभा में लाखों की भीड़ उमड़ रही है और बिट्टू को जमानत के लिए न्यायालय दर न्यायालय भटकना पड़ रहा है। बहरहाल भूपेश बघेल के खिलाफत में भाजपा के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा भी सामने आ गए है।

विष्णु देव साय ने जनता पर इस मुद्दे को छोड़ दिया कि छत्तीसगढ़ में संतो का सम्मान कौन करता है और अपमान कौन करता है ये जनता तय करे। कांग्रेस शासनकाल में भूपेश बघेल ने कालीचरण महाराज को गिरफ्तार करवाया था। मोहरा प्रमोद दुबे बने। कालीचरण महाराज ने तब श्राप दिया था कि भूपेश बघेल सहित उनके खिलाफ धर्मविरोधी कार्य करने वालों का हश्र जनता देखेगी। भूपेश बघेल सत्ता से बाहर हो गए। उनका पुत्र छह महीने से जेल में है। प्रमोद दुबे, डूबते जा रहे है।

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