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डिवाइन लेबोरेटरीज की याचिका छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने किया खारिज, 25 हजार का जुर्माना

बिलासपुर/रायपुर: हीपैरीन इंजेक्शन को अमानक पाए जाने पर सीजीएमएससीएल द्वारा की गई ब्लैकलिस्टिंग को चुनौती देने वाती याचिका निरस्त हाईकोर्ट ने निरस्त करने हुए कंपनी पर 25,000 का जुर्माना लागाया है। साथ ही कोर्ट ने कंपनी को नई याचिका लगाने की छूट प्रदान की है।

डिवाइन सेबोरेटरीज प्राइ‌वेट लिमिटेड द्वारा छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेस कॉर्पोरेशन लिमिटेड के उस आदेश को उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई थी, जिसमें कंपनी के द्वारा आपूर्ति किये गए हीपैरीन सोडियम इंजेक्शन को अमानक पाए जाने के कारण कंपनी को केवल हीपैरीन सोडियम इंजेक्शन के लिए तीन वर्षाें के लिए ब्लैकलिस्ट किया गया था। कंपनी ने इस प्रकरण में याचिका लगाई जिस पर 17 जुलाई कोउच्च न्यायालय के में सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता कंपनी ने सीजीएमएससीएल के उस आदेश को रद्द करने का आग्रह किया था, जिसके अंतर्गत उसे हीपैरीन इंजेक्शन आपूर्ति से तीन वर्षों के लिए प्रतिबंधित किया गया था।

न्यायालयीन कार्यवाही
मामले में राज्य सरकार की ओर से एडवोकेट जनरत प्रफुल भारत ने पक्ष रखा। वहीं, सीजीएमएससीएल की ओर से अधिवक्ता राघवेंद्र प्रधान, प्रस्तुत हुए। याचिकाकर्ता डिवाइन लेबोरेटरीज की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सी. जयंत के. राव ने याचिका का पक्ष रखा। उच्च न्यायालय ने प्रस्तुत मुद्दों के आधार पर यह याचिका पचीस हजार रुपये जुर्माने की खर्च के साथ निराकरण कर दी। हालांकि, याचिकाकर्ता कंपनी की आवश्यकता होने पर भविष्य में पुनः न्यायालय का दरवाजा खटखटाने की स्वतंत्रता प्रदान की गई है।

पृष्ठभूमि
यह मामता तब सामने आया जब रापपुर और अंबिकापुर के शासकीय अस्पतालों में हीपैरीन इंजेक्शन की प्रभावशीलता को लेकर गंभीर शिकायतें प्राप्त हुई हैं। सीजीएमएससीएल द्वारा दी गई गुण्वत्ता जांच में यह इंजेक्शन मानक से कम गुणवत्ता की पाई गई।

जनस्वास्य सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए सीजीएमएससीएल कार्रवाई करते हुए। संदिग्ध बैचों को तात्काल वापस मंगाया, उनके दर अनुबंध को समाप्त कर दिया गया। कंपनी को तीन साल के लिए ब्लैक लिस्टेड कर दिया गया।

सीजीएमएससी कार्रवाई को प्रमाणित करने तैयार
सीजीएमएससीएल पुनः यह स्पष्ट करता है कि जन स्वास्थ्य, गुणवत्ता और पारदर्शिता के सिद्धांतों पर कार्य करते हुए शिकायत प्राप्त होने पर वह नियमानुसार त्वरित एवं सख्त कार्रवाई करता है। भविष्य में भी यदि याचिकाकर्ता द्वारा पुनः कोई याचिका दायर की जाती है, तो निविदा शतों के अनुरूप की गई ब्लैकलिस्टिंग कार्रवाई को विधिक रूप से प्रमाणित करने के लिए सीजीएमएससीएल पूरी तरह तैयार है।

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