Chhattisgarh steel railway bridge: भारतीय रेलवे ने मिजोरम के लोगों के लिए एक बड़ी सौगात दी है. यहां दशकों से चली आ रही रेल कनेक्टिविटी की कमी अब पूरी होने जा रही है. यहां भिलाई के BSP से भेजे गए 30-35 हजार टन लोहे से पियर ब्रिज बना है, जो देश का दूसरा सबसे बड़ा ब्रिज है. ये कुतुबमीनार से भी ऊंचा है. ऐसे में छत्तीसगढ़ के लोहे ने दुनिया के सबसे ऊंचे चिनाब रेलवे ब्रिज, स्टैच्यू ऑफ यूनिटी, INS विक्रांत बनाने के बाद मिजोरम की राजधानी आइजोल में नया इतिहास रच दिया है.
छत्तीसगढ़ के लोहे से बना आइजोल का रेलवे-ब्रिज
मिजोरम की राजधानी आइजोल में बने कुतुबमीनार से ऊंचे रेलवे-ब्रिज में भिलाई के BSP से भेजे गए 30-35 हजार टन लोहा लगा है. वहीं बइरबी-सायरंग रेल प्रोजेक्ट के तहत ट्रैक, टनल और ब्रिज निर्माण के लिए बिलासपुर जोन के इंजीनियरिंग सपोर्ट, मशीनरी और विशेषज्ञ टीमें भेजी गई थी. इसके साथ ही रेलवे ट्रैक बिछाने में इस्तेमाल होने वाला रेलपांत, गर्डर, लोहा और स्टील मटेरियल भी भेजा गया था.
आजादी के बाद रेल नेटवर्क से जुड़ेगा मिजोरम
यह पहली बार है, जब आजादी के बाद मिजोरम की राजधानी आइजोल रेल नेटवर्क से जुड़ने जा रही है. आने वाले समय में रेल लाइन म्यांमार बॉर्डर तक जाएगी. इस रेल नेटवर्क से मिजोरम की विकास को नई दिशा मिलेगी. इस पियर ब्रिज को बनाने में 10 साल से अधिक का समय लगा. इसके बनने से अब 7 घंटे का सफर 3 घंटे में पूरा होगा.
2014 में हुई थी प्रोजेक्ट की शुरूआत
रेलवे के मुताबिक बइरबी-सायरंग रेल प्रोजेक्ट की शुरुआत 2014 में की गई थी, तब इसकी लागत 5 हजार 20 करोड़ रुपए थी, लेकिन ब्रिज और 51.38 किलोमीटर लंबी बइरबी-सायरंग रेल लाइन बनाने में 8 हजार 71 करोड़ रुपए लगे.
रेल लाइन पर बना 104 मीटर ऊंचा पुल
बइरबी-सायरंग रेलवे लाइन, आइजोल के लिए पहली डायरेक्ट रेल लाइन है और यह सिलचर से होते हुए राष्ट्रीय रेलवे नेटवर्क से जोड़ती है. इस रेलवे लाइन में कई पुल और 48 सुरंगें हैं. इस रेल लाइन पर बना एक पुल 104 मीटर ऊंचा है. इसे भूकंप रोधी तकनीक के आधार पर डिजाइन किया गया है. इस चुनौतीपूर्ण भूभाग से रेल लाइन का निर्माण रेलवे के लिए बड़ी कामयाबी है.
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