नवा रायपुर के माना-तूता क्षेत्र में प्रस्तावित फिल्म सिटी परियोजना को लेकर पेड़ों की कटाई का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। करीब 96 एकड़ जमीन पर विकसित की जा रही इस परियोजना के लिए अब तक 50 साल पुराने 150 से अधिक पेड़ काटे जा चुके हैं, जबकि लगभग 1500 और पेड़ों की कटाई की तैयारी है।
बताया जाता है कि राज्य गठन से पहले 1980 के दशक में इस क्षेत्र में लगभग पांच हजार पेड़ लगाए गए थे। वर्षों में यह क्षेत्र घने हरित क्षेत्र के रूप में विकसित हो गया। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई से पर्यावरण को नुकसान होगा। उनका कहना है कि नवा रायपुर में अन्य स्थानों पर पर्याप्त खाली जमीन उपलब्ध है, ऐसे में हरे-भरे क्षेत्र को उजाड़कर निर्माण करना उचित नहीं है।
पेड़ों की कटाई के विरोध में ग्रामीणों के साथ राजनीतिक दलों ने भी आवाज उठाई है। कांग्रेस नेता पंकज शर्मा ने कहा कि वे फिल्म सिटी निर्माण के विरोध में नहीं हैं, लेकिन पेड़ों की अंधाधुंध कटाई का विरोध किया जा रहा है। उनका सुझाव है कि सरकार चाहे तो किसी अन्य स्थान पर परियोजना विकसित कर सकती है।
वहीं, छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष मोना सेन ने कहा कि प्रयास होना चाहिए कि पेड़ों को काटने की नौबत न आए। जहां संभव हो, पेड़ों का स्थानांतरण कर उन्हें संरक्षित रखा जाए, ताकि पर्यावरणीय संतुलन बना रहे।
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