छत्तीसगढ़ सरकार के सुशासन तिहार का समापन एक दिन पहले ही हो गया। मुख्यमंत्री सचिवालय की ओर से सुविधानुसार इसकी इतिश्री कर दी गई। दरअसल अब सीएम हेल्पलाइन के नाम पर एक नया शिगूफा जारी किए जाने की तारीख समापन के एक दिन पहले का था।
यहां बता दें कि सुशासन तिहार को कितना असर समस्याएं जस की तस हैं। सरकार अपनी पीठ थपथपाने के अलावा कुछ नहीं कर रही। सरकार की नाकामी का एक उदाहरण यह देखने में आया कि विघुत वितरण कंपनी का 10 प्रतिशत शेयर आईपीओ के माध्यम से बेचने जा रही है। लगातार घाटे में चल रही कंपनियों को उबारने के बदले अब उन्हें पंगू बनाने का काम सरकार कर रही है।
मंडल के अध्यक्ष सुबोध सिंह हैं, उन्होंने यहां कदम रखते ही सरकार को ऐसा सुझाव दिया है कि आने वाले समय में प्रदेश का संसाधन निजी क्षेत्रों को बेचने की तैयारी कर ली गई है। छत्तीसगढ़ में बिजली बनाने का पूरा संसाधन राज्य के पास उपलब्ध है। राज्य में बनने वाली बिजली को वितरण का काम पावर ट्रांसमीशन कंपनी के पास है। सरकार इसका शेयर निकालकर उद्योगपतियो को पिछले दरवाजे से बेचने का प्रयास कर रही है।
धान से पर्दा उठा रही सरकार
वहीं सरकार का एक निर्णय की धान की फसल के बदले दूसरी बैकल्पिक फसल लेने पर 15 हजार की राशि देने का है। स्वयं इसके नाम पर किसानों को 3100 देकर सरकार में आए और अब किसानों को धान बोने से भटकाने खाद बीज की कमी कर रही है। एक एकड़ में किसानों का 65000 रुपए धान बेचने से मिल जाता है, ऐसे में दूसरी फसल लेकर वे बाजार खोजे इसके लिए सरकार का कोई इंतजाम नहीं है। माना की ये फसलें धान से ज्यादा कीमत दे सकती हैं, लेकिन यहां का मौसम ऐसा नहीं कि इन फसलों की पैदावारी अच्छी रहे।
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