North East Insurgency: केंद्र सरकार ने नक्सल प्रभावित इलाकों में बड़ी सफलता के बाद अब पूर्वोत्तर राज्यों में सक्रिय उग्रवादी संगठनों पर शिकंजा कसने की तैयारी शुरू कर दी है. सरकारी सूत्रों के मुताबिक, सरकार ने वर्ष 2029 तक पूर्वोत्तर क्षेत्र में उग्रवाद और उससे जुड़े नेटवर्क को कमजोर करने का लक्ष्य तय किया है. इस अभियान की शुरुआत मणिपुर से किए जाने की संभावना है, जहां हाल के वर्षों में सबसे ज्यादा हिंसक घटनाएं सामने आई हैं.
केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) की तैनाती में बदलाव जल्द शुरू हो सकता है. पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव प्रक्रिया और अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा ड्यूटी पूरी होने के बाद अतिरिक्त बलों को पूर्वोत्तर की ओर भेजा जाएगा. जिन जवानों को पहले नक्सल प्रभावित इलाकों में लगाया गया था, उनमें से कुछ विशेष इकाइयों को अब मणिपुर, असम, नागालैंड और अरुणाचल प्रदेश में तैनात किया जा सकता है.
इन यूनिट को किया जाएगा अलग-अलग क्षेत्रों में तैनात
सूत्रों का कहना है कि सीआरपीएफ की कोबरा जैसी विशेष यूनिट, जिन्हें गुरिल्ला युद्धक रणनीति का अनुभव है, उन्हें चरणबद्ध तरीके से पूर्वोत्तर भेजने की योजना है. हालांकि नक्सल प्रभावित इलाकों से सुरक्षाबलों की पूरी वापसी नहीं होगी, बल्कि जरूरत के हिसाब से धीरे-धीरे पुनर्संतुलन किया जाएगा.
मणिपुर प्रशासनिक अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि संवेदनशील क्षेत्रों के लिए नए माइन-प्रोटेक्टेड वाहन और बुलेटप्रूफ गाड़ियां पहुंचनी शुरू हो गई हैं. उखरूल जैसे इलाकों में सुरक्षा तैयारियां तेज की जा रही हैं, जहां समय-समय पर जातीय तनाव और सशस्त्र झड़पें सामने आती रही हैं.
मणिपुर में सबसे ज्यादा घटनाएं
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, पूर्वोत्तर में उग्रवाद से जुड़ी घटनाओं में पिछले दशक में बड़ी गिरावट आई है. 2014 में जहां 824 घटनाएं दर्ज हुई थीं, वहीं 2024 में यह संख्या घटकर 294 रह गई. इनमें भी सबसे ज्यादा मामले मणिपुर से जुड़े रहे.
सरकार अब उग्रवाद के साथ-साथ नशीले पदार्थों की तस्करी पर भी सख्ती करने जा रही है. माना जा रहा है कि ड्रग्स कारोबार से मिलने वाला पैसा कई उग्रवादी संगठनों तक पहुंचता है. इसी कारण नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो को भी विशेष कार्रवाई की जिम्मेदारी दी गई है.
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