Mukul Roy: पूर्व रेल मंत्री और तृणमूल कांग्रेस के कद्दावर नेता रहे मुकुल रॉय का रविवार रात 1.30 बजे निधन हो गया. वे लंबे समय से कई बीमारियों से जूझ रहे थे. रॉय पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी के करीबी और मुख्य सहयोगी माने जाते थे. कभी उनके पास पार्टी में नंबर-2 की हैसियत थी. उन्हें ‘क्राइसिस मैनेजर’ के तौर पर जाना जाता था. TMC के लिए चुनाव रणनीति बनाने का काम भी करते थे.
कोलकाता में हुआ देहांत
मुकुल रॉय लंबे वक्त से कई बीमारियों से जूझ रहे थे. मुकुल रॉय के बेटे शुभ्रांशु रॉय ने बताया कि वे कई बीमारियों से एक साथ जूझ रहे थे. समस्या बढ़ने पर उन्हें कोलकाता के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था. जहां उनका इलाज चल रहा था. दिक्कतें कम होने की जगह बढ़ रही थीं. सीनियर डॉक्टर्स की टीम भी उन्हें बचा नहीं पाई.
बंगाल के राजनीति के चाणक्य माने जाते थे
एक ऐसा भी समय था जब मुकुल रॉय को ‘पश्चिम बंगाल की राजनीति का चाणक्य’ कहा जाता था और उनके पास टीएमसी में नंबर दो की हैसियत थी. साल 2011 में टीएमसी ने जब कम्यूनिस्ट पार्टी को सत्ता से उखाड़ फेंका और ममता बनर्जी वेस्ट बंगाल की सीएम बनीं तो रॉय की पार्टी में अहम भूमिका थी. वर्ष 2015 तक पार्टी में रहते हुए उन्होंने कम्यूनिस्ट पार्टी और कांग्रेस के कई नेताओं को पार्टी में शामिल कराया. वहीं, उनका नाम शारदा चिटफंड स्कैम और नारदा स्टिंग ऑपरेशन से जुड़ने के बाद विवादों में रहा.
2017 में बीजेपी में शामिल हुए
मुकुल रॉय तृणमूल कांग्रेस के संस्थापक सदस्यों में से एक रहे. उनका राजनीतिक करियर उतार-चढ़ाव भरा रहा. टीएमसी के रणनीतिकारों और सीएम ममता बनर्जी के करीबियों में गिनती होती थी. साल 2006 में वे राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए और 2009 से 2012 तक सदन के नेता के तौर पर काम किया. केंद्र में कांग्रेस की सरकार में पहले शिपिंग मंत्रालय में राज्य मंत्री और बाद में रेल मंत्री के तौर पर जिम्मेदारी संभाली.
पार्टी में मनमुटाव बढ़ने पर साल 2017 में उन्होंने टीएमसी छोड़ बीजेपी का दामन थाम लिया. उन्होंने बीजेपी के संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई. साल 2019 में हुए लोकसभा चुनाव में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी को 18 सीटें दिलाई. साल 2021 में हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में वे कृष्णानगर उत्तर सीट से चुनकर आए. हालांकि बीजेपी के साथ उनका साथ बहुत दिनों तक नहीं रहा, जून 2021 में टीएमसी में लौट आए.
रेल किराए को लेकर बड़ा फैसला
यूपीए-2 सरकार में टीएमसी सहयोगी पार्टी थी. TMC सांसद दिनेश त्रिवेदी रेल मंत्री थे. रेल बजट में उन्होंने रेल किराया बढ़ाने की घोषणा की थी. इसके बाद उन्हें अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था. इसके बाद मुकुल रॉय को रेल मंत्री बनाया गया. वे इस पद पर मार्च 2012 से सितंबर 2012 तक रहे. इस छोटे से कार्यकाल में उन्होंने कई खास कदम उठाए. मुकुल रॉय ने रेल मंत्री का पदभार ग्रहण करते ही एसी फर्स्ट क्लास और सेकेंड क्लास को छोड़कर एसी थर्ड क्लास, स्लीपर और जनरल क्लास का किराया वृद्धि वापस ले लिया था. जिसकी सराहना की गई थी.
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