UP Ministers Portfolio: उत्तर प्रदेश की योगी सरकार में मंत्रिमंडल विस्तार के बाद आखिरकार नए मंत्रियों के बीच विभागों का बंटवारा कर दिया गया है. विभाग बंटवारे से पहले सीएम योगी ने दिल्ली में पार्टी आलाकमान से मुलाकात की थी. इसके बाद भी मंत्रियों को विभाग वितरित किए गए हैं. इस फैसले के साथ ही सरकार ने साफ संकेत दे दिए हैं कि अब 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों को ध्यान में रखकर राजनीतिक और सामाजिक समीकरण साधे जाएंगे.
सरकार में शामिल किए गए पूर्व यूपी बीजेपी अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी को सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम यानी MSME विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई है. माना जा रहा है कि छोटे उद्योगों और रोजगार बढ़ाने के मोर्चे पर सरकार उन्हें बड़ी भूमिका देना चाहती है. वहीं समाजवादी पार्टी से बगावत कर बीजेपी के करीब आए मनोज पांडेय को खाद्य एवं रसद तथा नागरिक आपूर्ति विभाग सौंपा गया है.
इसके अलावा अजीत पाल सिंह को खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग मिला है, जबकि सोमेंद्र तोमर को सैनिक कल्याण, राजनीतिक पेंशन और प्रांतीय रक्षक दल जैसी जिम्मेदारियां दी गई हैं. कृष्णा पासवान को पशुधन एवं दुग्ध विकास विभाग का प्रभार मिला है. वहीं कैलाश राजपूत को ऊर्जा स्रोत विभाग और सुरेंद्र दिलेर को राजस्व विभाग में जिम्मेदारी दी गई है. हंसराज विश्वकर्मा को MSME विभाग में राज्यमंत्री बनाया गया है.
10 मई को हुआ था कैबिनेट का विस्तार
दरअसल 10 मई को हुए मंत्रिमंडल विस्तार में छह नए चेहरों को कैबिनेट में जगह मिली थी, जबकि दो राज्य मंत्रियों को प्रमोशन दिया गया था. अब विभागों के बंटवारे के बाद राजनीतिक हलकों में इसे बीजेपी की सोशल इंजीनियरिंग रणनीति माना जा रहा है. पार्टी ने दलित, पिछड़ा, ब्राह्मण, जाट और अन्य जातीय समीकरणों को साधने की कोशिश की है. ताकि आने वाले चुनावों में विपक्ष के PDA फार्मूले का जवाब दिया जा सके.
क्या मैसेज देना चाहती है बीजेपी
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस फेरबदल के जरिए योगी सरकार संगठन और सरकार के बीच संतुलन बनाने के साथ-साथ क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को भी मजबूत करना चाहती है. खासतौर पर भूपेंद्र चौधरी और मनोज पांडेय जैसे चेहरों को अहम जिम्मेदारी देकर बीजेपी ने बड़ा राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की है.
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