राजस्थान में NEET-UG 2026 परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक के आरोपों और मामले की CBI जांच के आदेश के बाद (Paper Leak Protest) छात्र संगठन AIDSO ने केंद्र स्तर पर आयोजित परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। संगठन ने NTA की कार्यप्रणाली की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि एजेंसी लगातार निष्पक्ष, पारदर्शी और सुरक्षित परीक्षा आयोजित करने में विफल रही है। AIDSO ने बयान जारी कर कहा कि पिछले कई वर्षों से विभिन्न केंद्रीय परीक्षाओं में पेपर लीक, अनियमितता और हेरफेर के मामले सामने आते रहे हैं, जिससे ईमानदारी से तैयारी कर रहे लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हो रहा है।
न्यायिक जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग (Paper Leak Protest)
संगठन ने उत्तर प्रदेश के लखीमपुर निवासी छात्र ऋतिक मिश्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि NEET पेपर लीक की जानकारी मिलने के बाद वह मानसिक तनाव में आ गया था और इसी तनाव के कारण उसने आत्महत्या जैसा कदम उठाया। संगठन का दावा है कि ऐसे कई छात्र अभी भी मानसिक दबाव झेल रहे हैं।
AIDSO ने आरोप लगाया कि इतनी अधिक प्रचारित “सुरक्षित” परीक्षा प्रणाली में सेंध लगना किसी साधारण व्यक्ति का काम नहीं हो सकता। यह संगठित कदाचार प्रभावशाली और ऊंचे स्तर के नेटवर्क की संलिप्तता की ओर संकेत करता है। संगठन ने कहा कि यदि हर बार वास्तविक दोषियों को बचा लिया जाएगा या जांच निष्कर्षहीन रहेगी, तो छात्र और अभिभावक केंद्रीय परीक्षाओं पर विश्वास कैसे बनाए रखेंगे।
पेपर लीक से छात्रों का टूटा भरोसा
संगठन ने यह भी कहा कि अत्यधिक केंद्रीकृत परीक्षा प्रणाली और लगातार हो रहे घोटाले कोचिंग उद्योग को बढ़ावा दे रहे हैं, जिससे छात्रों और अभिभावकों पर मानसिक, आर्थिक और शैक्षणिक दबाव बढ़ रहा है। AIDSO ने इसे चिकित्सा शिक्षा के निजीकरण और शिक्षा व्यवस्था में बढ़ते भ्रष्टाचार का परिणाम बताया। AIDSO ने मांग की है कि NEET-UG और अन्य राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं से NTA को हटाया जाए तथा परीक्षाएं सरकार द्वारा सीधे पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ आयोजित की जाएं।
AIDSO की प्रमुख मांगें:
न्यायिक निगरानी में पारदर्शी और समयबद्ध जांच हो।
पद और शक्ति की परवाह किए बिना सभी दोषियों को कठोर दंड दिया जाए।
जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।
राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए तत्काल कदम उठाए जाएं।
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