MP News: भाजपा विधायक संजय पाठक से संबंधित मानहानि मामले में शुक्रवार को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में सुनवाई हुई. मामला जैसे ही जस्टिस विशाल मिश्रा की समर वेकेशन बेंच के समक्ष पहुंचा, जहां उन्होंने बिना किसी विस्तृत सुनवाई के स्वयं को इससे अलग कर लिया. विशाल मिश्रा ने आदेश पारित करते हुए कहा कि प्रकरण को अगले सप्ताह ऐसी न्यायपीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया जाए, जिसमें वे शामिल न हों.
मानहानि याचिका से जुड़ा है मामला
यह विवाद कटनी निवासी पूर्व आर्म्स डीलर नाजिम खान द्वारा दायर याचिका से जुड़ा है. नाजिम खान का कहना है कि विधायक संजय पाठक ने सार्वजनिक रूप से उन पर गंभीर आरोप लगाए थे. कथित तौर पर पाठक ने कहा था कि उनकी दुकान से हजारों गोलियां गायब हैं और वहां अवैध हथियारों की बिक्री की जाती है. नाजिम खान ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए एक करोड़ रुपये की मानहानि का दावा किया है और विधायक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की है.
मानहानि याचिका से जुड़ा है मामला
यह विवाद कटनी निवासी पूर्व आर्म्स डीलर नाजिम खान द्वारा दायर याचिका से जुड़ा है. नाजिम खान का कहना है कि विधायक संजय पाठक ने सार्वजनिक रूप से उन पर गंभीर आरोप लगाए थे. कथित तौर पर पाठक ने कहा था कि उनकी दुकान से हजारों गोलियां गायब हैं और वहां अवैध हथियारों की बिक्री की जाती है. नाजिम खान ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए एक करोड़ रुपये की मानहानि का दावा किया है और विधायक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की है.
सोशल मीडिया इंटरव्यू पर उठाया सवाल
याचिका के अनुसार, अक्टूबर 2025 में सोशल मीडिया पर दिए गए एक इंटरव्यू में संजय पाठक ने नाजिम खान के बारे में कई ऐसे बयान दिए, जिनसे उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा. आरोप है कि विधायक ने उनकी दुकान से 14 हजार गोलियां गायब होने, अवैध हथियारों के कारोबार और आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों को हथियार लाइसेंस दिलाने जैसे दावे सार्वजनिक मंचों पर किए थे. इसके बाद नाजिम खान ने उन्हें एक करोड़ रुपये का मानहानि नोटिस भी भेजा था.
पुलिस कार्रवाई नहीं होने पर पहुंचे हाई कोर्ट
याचिकाकर्ता का कहना है कि उन्होंने इस मामले में कई बार पुलिस से शिकायत की, लेकिन न तो कोई एफआईआर दर्ज की गई और न ही जांच शुरू हुई. इसी कारण उन्होंने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाते हुए पुलिस को कार्रवाई के निर्देश देने की मांग की है.
पहले भी सुनवाई से अलग हो चुके हैं जस्टिस मिश्रा
गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब जस्टिस विशाल मिश्रा ने संजय पाठक से जुड़े किसी मामले की सुनवाई से खुद को अलग किया हो. इससे पहले अवैध खनन से संबंधित एक अन्य प्रकरण में भी उन्होंने सितंबर 2025 में सुनवाई से अलग होने का फैसला लिया था. उस समय अपने आदेश में उन्होंने उल्लेख किया था कि विधायक द्वारा उनसे फोन पर संपर्क करने की कोशिश की गई थी.
आपराधिक अवमानना का मामला लंबित
बाद में तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा की खंडपीठ ने न्यायपालिका की निष्पक्षता और गरिमा को ध्यान में रखते हुए संजय पाठक के खिलाफ आपराधिक अवमानना का मामला दर्ज करने के आदेश दिए थे. इस मामले की सुनवाई फिलहाल लंबित है.
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