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नीचे के अधिकारी नाराज है

छत्तीसगढ़ में भारतीय जनता पार्टी की सरकार को दो साल हो चुके हैं और अब सरकार के कार्यकाल के ढाई साल पूरे होने जा रहे हैं। यानी आधा कार्यकाल पूरा होने की ओर है और आगे के ढाई साल सरकार कैसे बेहतर तरीके से चलाए जाएं तथा आगामी चुनाव में सरकार की वापसी कैसे सुनिश्चित हो, इसे लेकर संगठन में मंथन जारी है। लेकिन सरकार के भीतर इन दिनों एक बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा होता नजर आ रहा है।

इसकी वजह एक ऐसे अधिकारी को बताया जा रहा है, जिन्हें यहां के अधिकारी ‘इंपोर्टेड’ अधिकारी या ‘हेलीकॉप्टर लैंडिंग’ से आए अधिकारी के तौर पर देखते हैं। उनके बढ़ते प्रभाव को लेकर प्रदेश के निचले स्तर के अधिकारियों में नाराजगी की स्थिति बनती जा रही है। अधिकारियों के बीच यह धारणा मजबूत होती जा रही है कि जब तक हेलीकॉप्टर से उतरे इस अधिकारी की सहमति नहीं मिलती, तब तक प्रदेश में किसी भी आदेश को अमल में लाना मुश्किल है।

कैबिनेट में कौन से विषय ले जाने हैं या किसी विषय पर विचार-विमर्श करना है, इस संबंध में भी नीचे के अधिकारियों के बीच चर्चा है कि दिल्ली का हवाला देकर आए एक अधिकारी हर मामले में हस्तक्षेप कर रहे हैं। प्रदेश के सबसे ज्यादा करंट लगने वाले विभागों में से एक विभाग की जिम्मेदारी भी इन्हीं के पास है। यही वजह है कि विभाग के भीतर चल रहे कई मामलों को लेकर नीचे के अधिकारी भी मौके की तलाश में हैं कि यदि कोई ऐसा अवसर सामने आए, तो प्रदेश में बढ़ते असंतोष में इस अधिकारी की भूमिका को प्रमुखता से सामने लाया जा सके।

बताया जाता है कि इन दिनों पूरे प्रदेश में बिजली गुल होने की समस्या लगातार बढ़ती जा रही है। जिस स्थान पर छत्तीसगढ़ विद्युत मंडल बोर्ड का मुख्यालय है, उसके आसपास के इलाकों में भी हर दिन कभी भी एक-दो घंटे तक बिना सूचना के बिजली बंद हो रही है। ऐसा नहीं है कि समस्या केवल राजधानी तक सीमित है। राजधानी से सुदूर अंचल के जिलों में भी बिजली कटौती का यही आलम बताया जा रहा है।

बताया जाता है कि विद्युत आपूर्ति में बार-बार आ रही बाधा की एक वजह बिजली आपूर्ति के लिए लगाए गए तारों में हुआ बड़ा खेल है। घटिया दर्जे के तारों की खरीदी और ट्रांसफार्मरों की स्थिति के चलते प्रदेश में बिजली गुल होना जैसे सामान्य बात बनती जा रही है।

आखिर ऐसा क्या हुआ कि कांग्रेस शासनकाल में जिस बिजली आपूर्ति को लेकर कभी भी इतनी परेशानी सामने नहीं आती थी, भाजपा शासनकाल में घंटों बिजली बंद होने की शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं? कहा जाता है कि यह एक प्रकार से निजी क्षेत्र को बिजली आपूर्ति करने, यानी सरकार को लाभ पहुंचाने और इसकी आड़ में उद्योगों को मदद करने की एक बड़ी योजना का हिस्सा है।

आम उपभोक्ता, जिसके पास शिकायत करने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा है, वह हर दिन बिजली गुल होने पर सरकार को कोस रहा है और कांग्रेस शासन को याद कर रहा है। लोगों के बीच यह चर्चा भी है कि कांग्रेस शासन में घोटालों का स्तर कितना भी बड़ा क्यों न रहा हो, लेकिन बिजली कटौती ने आम आदमी को इस तरह परेशान नहीं किया था।

यही नहीं, बिजली के बिल में अचानक हुई बढ़ोतरी भी सरकार के लिए एक बड़ा सवाल बन गई है। वर्ष 2026 के एक माह विशेष में अचानक पूरे प्रदेश के लोगों के घरों का बिजली बिल करीब 30 फीसदी बढ़ गया था। ऐसा क्यों हुआ, इसे लेकर भी सवाल उठे। कहा जाता है कि सॉफ्टवेयर में ऐसा कोई खेल खेला गया, जिसके चलते पूरे प्रदेश के उपभोक्ताओं को अपनी जेब से 30 फीसदी अधिक राशि चुकानी पड़ी।

यह मुद्दा अब कांग्रेस के लिए भी बड़ा राजनीतिक हथियार बन गया है। कांग्रेस इसे लेकर सड़क पर है और सरकार को घेरने की कोशिश कर रही है। लेकिन चर्चा यह है कि हेलीकॉप्टर से आए इस अधिकारी को इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ रहा कि उनके कार्यों और फैसलों के चलते प्रदेश की सत्ता को आने वाले चुनाव में नुकसान का सामना करना पड़ सकता है।

बताया जाता है कि यह बात अब संगठन के कानों तक भी पहुंच चुकी है। दिल्ली से आए इस अधिकारी के क्रियाकलापों को लेकर केवल संगठन ही नाराज नहीं है, बल्कि निचले स्तर के वे अधिकारी भी असंतुष्ट बताए जा रहे हैं, जिनके निर्णयों और अधिकारों को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है। अधिकारियों के बीच यह भावना बढ़ती जा रही है कि उनके निर्णयों को महत्व नहीं दिया जा रहा और कई मामलों में उन्हें दरकिनार कर दिया जाता है। यही नाराजगी आने वाले दिनों में सरकार और संगठन के लिए कितना बड़ा राजनीतिक सिरदर्द बनती है, यह देखने वाली बात होगी।

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