सुंदरकांड में एक बात लिखी हुई है,
निर्मल मन जन सो मोहि पावा!
मोहि कपट, छल, छिद्र न भावा!!
कल ये बात उच्चतम न्यायालय में सिद्ध हो गई। बाप बेटे छत्तीसगढ़ का उच्च न्यायालय छोड़ सीधे दिल्ली पहुंच गए थे। इतने सारे वकीलों की फौज होने के बावजूद कानून की अज्ञानता गले से नीचे नहीं उतरती है। खैर, सुंदरकांड में एक बात और भी लिखी है-
क्रोधिहि सम कमिही हरिकथा,
उसर बीज बएं फल जथा!
जिस प्रकार बंजर जमीन में बीज डालने से फसल नहीं होती वैसे ही सीधे उच्चतम न्यायालय के शरण में जाने से। न्याय नहीं मिल सकता है। भूपेश बघेल को अब अपने बेटे के साथ अपनी चिंता सताने लगी है। आबकारी और महादेव सट्टा दोनों मामले में शक की सुइया भूपेश बघेल के तरफ है, सप्रमाण।
अपने शासन काल में फर्जी मामले बना कर जीपी सिंह, अशोक चतुर्वेदी, सुनील नामदेव, निलेश शर्मा को निपटाने की बहुत कोशिश की गई थी। सभी को फसाने के लिए मुख्यमंत्री कार्यालय की सौम्या चौरसिया सरगना बनी थी। पुलिस के कुछ दलालो जिसमें अभिषेक माहेश्वरी प्रमुख था, प्रसिद्धि पाने के लिए सारे नियम कायदे तोड़ कर मामले बनाए थे।
खुद सोना ट्रांसपोर्ट कर जीपी सिंह को परेशान किया। अशोक चतुर्वेदी के विरुद्ध तमाम फर्जी मामला बना कर बर्बाद करने में कमी नहीं की गई! फर्जी मामला का आलम ये था की जो कभी अमेरिका अरब नहीं गया उसे न्यूयार्क इस्तांबुल दुबई जाने का मामला बना दिए. पासपोर्ट पुलिस अपने पास रख ली पर इमिग्रेशन में कुछ कर नहीं पाये!
सुनील नामदेव के घर में मादक पदार्थ रखवा कर नारकोटिक्स का केस बनाया गया। निलेश शर्मा याने मुझे लड़कियों के धंधे में जोड़ दिया गया। इतने लोगों की बुरी आह लगनी ही थी, लगी और आगे और लगेगी। सभी का घर परिवार होता है, सभी के मां बाप, भाई बहन, होते है। पत्नी होती है, बच्चे होते है। चारों के घर में दर्जन भर पुलिस वालों को भेजना अपने निरंकुश होने का प्रमाण देना था।आज चारों को परेशान करने, जेल भेजने वालों की असलियत सामने है।
सुंदरकांड में ये भी लिखा है
सचिव, बैदे, गुरु तीनी जो प्रिय बोलहि भय आस!
राज धर्म तन तीनी कर होही बैगिही नाश!!
सौम्या चौरसिया जिला बदर भी नहीं राज्य बदर है। अभिषेक माहेश्वरी बस्तर में छटपटा रहा है। बालोद आना चाहता है, भाजपा के एक नेता की मदद से लेकिन छटपटाहट खत्म नहीं हो रही है।जिस मुख्यमंत्री के शह पर राज्य में पुलिस की गुंडागर्दी दौड़ रही थी आज आंच उसके घर तक पहुंच गई है। भूपेश बघेल, स्वयं पिता है, बेटे का दर्द झेल रहे है। परिवार परेशान है। सब यही चुकाना है। आपके घोटाले और आतंक के ताबूत पर चार खीला ठुक रहा है।
सुंदर कांड में लिखा है
काम, क्रोध,”मद”, लोभ सब नाथ नरक के पंथ!
और लिखा गया है
जहां सुमति तह संपत्ति निदाना!
जहां कुमति तह विपत्ति निदाना!!
ख़ुद सौ से अधिक लोगो को जेल भेज चुका प्राणी ना जाने कितने परिवार का बद्दुवा ले रहा है !सूर्यकांत की चमक ख़त्म हो गई, अनवर अब आह भर रहा, अनिल टूट चुका है, जो टीन की कुर्सी में वेस्टर्न कमोट का आनंद उठा रहा है, रानू जेल की रानी बन गई, समीर बेचारा हो गया, अरुणपति जेलपति बन गया, बाइस आबकारी के अधिकारी अब दारू पीना सिख गए! यही है ईश्वर का न्याय! अभी बहुत कुछ देखा जाना है !!!
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