छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा कहा जाता है। धान से चांवल बनता है।इसी कारण राज्य में सरकार धान चांवल ही बनाती है। ये बात अलग है चांवल में घोटाला होता है और काला बाजारी भी होती है। चांवल के बारे में कहा जाता है कि पुराना चांवल कीमती होता है, स्वादिष्ट होता है बढ़िया पकता है।नया चांवल फदफदा जाता है। छत्तीसगढ़ के मंत्री मंडल का भी यही हाल है। नए मंत्री सुशासन को फदफदा दे रहे है। इस मंत्री मंडल में पुराना चांवल रूपी तीन मंत्री है राम विचार नेताम, केदार कश्यप और दयाल दास बघेल, थे तो बृज मोहन अग्रवाल भी लेकिन इस महा पुराने चांवल को कंकड़ के समान राज्य से केंद्र फेक दिया गया है।
पहले दो मंत्री कम थे, मोहन के जाने से तीन हो गए। तीन मंत्री और दावेदार पुराने नए को मिलकर सात आठ लोग है। पुराना चांवल में अमर अग्रवाल, अजय चंद्राकर, राजेश मुणत, लता उसेंडी प्रमुख देवदार होकर भी दावेदार नहीं है। नए में तीन नाम आगे दौड़ रहे है गजेन्द्र यादव देवानंद है हर सूची में शामिल है दो नाम बदलते रहते है फिलहाल खुशवंत सिंह और राजेश(मुणत नहीं)अग्रवाल आगे है।

मायूस हो रहे है पुराने लोग और नए में पुरंदर मिश्र(राष्ट्रपति की पसंदगी) सहित कुछ दोबारा चुने विधायक। भीतर के बवाल को माने तो अब बात यहां अटक रही है कि एक भी पुराना नहीं रहेगा।मतलब पुराना चांवल नहीं महकेगा। नया चांवल फॉर्मूला लग सकता है इसका अर्थ ये है कि तीन पुराने मंत्री के लिए बाहर का रास्ता ही विकल्प बच रहा है ।अगर समीकरण बैठा तो ठीक नहीं तो मुख्यमंत्री विदेश चले जाएंगे।राजभवन फिर से इंतजार करेगा।
INDIA WRITERS Voices of India, Words That Matter