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MP News: जबलपुर में 41 किलो चांदी की बनी अनोखी गणेश प्रतिमा, हर दो साल में बढ़ता है वजन

MP News: पूरे देश में गणेश उत्सव बड़े ही धूमधाम से मनाया जा रहा है. जगह-जगह भगवान गणपति की तरह-तरह की प्रतिमा स्थापित की गई है. मध्य प्रदेश के जबलपुर शहर में एक ऐसी प्रतिमा स्थापित की गई है जो अपने आप में बेहद अनोखी है. क्योंकि यह मिट्टी से नहीं बल्कि चांदी से बनी हुई है और उसकी कीमत भी सुनकर आप हैरान रह जाएंगे.

चांदी से बनी है गणेश की प्रतिमा
चमचमाती हुई भगवान गणेश की ये प्रतिमा मिट्टी से नहीं बल्कि पूरी तरह चांदी से बनी हुई है. इस प्रतिमा का आकर्षण ही कुछ ऐसा है कि जो एक बार इसे देख ले वह देखता ही रह जाता है. चांदी की चमक मन में लालच नहीं बल्कि शांति पैदा करती है और यही वजह है कि जबलपुर में स्थापित की गई भगवान गणेश कि चांदी की प्रतिमा आकर्षण का केंद्र बनी हुई है. इस प्रतिमा की खास बात यह है कि साल दर साल इसका वजन बढ़ता जा रहा है. यानी मन्नतों की चांदी से उनका वजन और आकार दोनों बढ़ता जा रहा है. इस बार चांदी की प्रतिमा का वजन 41 किलो है और उसकी ऊंचाई करीब 51 इंच है. चांदी के आज के भाव के हिसाब से अगर इसकी कीमत का आकलन किया जाए तो करीब 41 लाख रुपए इस प्रतिभा की कीमत आएगी.

हर दो साल में तैयार होती है नई प्रतिमा
मंदिर के संस्थापक पं. प्रमोद तिवारी ने बताया ललपुर स्थित सिद्ध गणेश धाम की स्थापना आज से 15 साल पहले की गई थी. आज रजत गणेश जबरपुर की पहचान बन चुके हैं. यहां मन्नतों के पूरे होने की मान्यता है. जो लोग मन्नतें मांगते हैं वो पूर्ण हो जाती हैं. वे सामथ्र्य अनुसार चांदी चढ़ाकर जाते हैं. जिसके चलते हर एक-दो साल में उस चांदी को मिलाकर गणेश जी की नई प्रतिमा बनवा ली जाती है. ऐसे में यह मन्नतों की चांदी से आज 41 किलो वजनी व आकार में भी दो फीट से ज्यादा ऊंची हो चुकी है. ये प्रतिमा केवल गणेशोत्सव के दौरान ही बाहर आती है, बाकी पूरे साल सुरक्षित स्थान पर विराजमान कर गुप्त पूजन किया जाता है. शास्त्रों में चांदी से निर्मित गणेश मूर्ति की पूजा करने से धन, वैभव, सुख, शांति, सम्पदा प्राप्त होने एवं कष्टों का क्षरण कर जीवन में खुशहाली आने का उल्लेख मिलता है.

भक्तों की प्रतिमा में अटूट श्रद्धा
चांदी की प्रतिमा के दर्शन करने के लिए हर साल गणेश उत्सव पर हजारों भक्त दर्शन करने के लिए आते हैं और अपनी मनोकामनाएं मांगते हैं. पहले साल सवा 5 किलो चांदी की प्रतिमा स्थापित की गई थी और फिर साल बढ़ते गए और चांदी की प्रतिमा का वजन भी बढ़ता गया. आज जो भी इस चांदी की प्रतिमा को देखता है तो वह देखता ही रह जाता है. भक्तों की इस प्रतिमा में अटूट श्रद्धा है.

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