महिला आरक्षण बिल पर राजनीति तेज, कांग्रेस और बीजेपी आमने-सामने

देश में महिला आरक्षण बिल को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव बढ़ गया है। कांग्रेस ने सरकार पर आरोप लगाया है कि वह इस बिल को जानबूझकर लागू नहीं कर रही है। कांग्रेस का कहना है कि 543 सीटों में से तुरंत एक-तिहाई (181 सीटें) महिलाओं को आरक्षण दिया जाना चाहिए। साथ ही, बिल में जो शर्तें जोड़ी गई हैं, उन्हें हटाने की मांग भी की गई है।

कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि उनका हालिया संबोधन डर और घबराहट दिखाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार महिला आरक्षण के नाम पर परिसीमन के जरिए राजनीति करना चाहती है।

कांग्रेस ने यह भी ऐलान किया है कि वह देश के 29 शहरों में प्रेस कॉन्फ्रेंस करके इस मुद्दे को जनता तक पहुंचाएगी। कांग्रेस के अनुसार, सरकार महिला आरक्षण लागू करने से बच रही है और बिल में शर्तें लगाकर इसे रोका जा रहा है। 2023 में बिल पास होने के बावजूद इसे देर से लागू किया गया। परिसीमन के कारण कुछ राज्यों का प्रतिनिधित्व कम होने की भी आशंका जताई गई है।

कांग्रेस ने प्रधानमंत्री पर यह भी आरोप लगाया कि उन्होंने अपने 29 मिनट के भाषण में 58 बार कांग्रेस का नाम लिया, जो उनकी बेचैनी दिखाता है। पार्टी ने बीजेपी पर महिलाओं को पर्याप्त प्रतिनिधित्व न देने का भी आरोप लगाया। उनके अनुसार, बीजेपी के 240 सांसदों में केवल 31 महिलाएं हैं और मंत्रिमंडल में भी महिलाओं की संख्या कम है।

कांग्रेस ने महिलाओं से जुड़े कई मुद्दों का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार इन मामलों पर चुप रही है। कुल मिलाकर, महिला आरक्षण बिल को लेकर दोनों पार्टियों के बीच बहस तेज हो गई है और आने वाले समय में यह मुद्दा और बढ़ सकता है।

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