ढांक के तीन पात…बिजली और अफसर शाही

प्रदेश सरकार ने केंद्र की योजना को पूरा करने की बीड़ा उठाया है। पीएम सूर्य घर योजना को लेकर बड़े लक्ष्य रखे गए हैं। लक्ष्य की पुर्ति न होने पर राज्य सरकार ने जनता के हित के योजनाओं को ही छेड दी। अब जनता भी देख रही है कि कि मुफ्त में पैसा बांटने की योजनओं को आगे बढ़ा कर आम लोगों के जेब पर डाका डालने में लगी है। इन योजनाओं में महतारी वंदन, किसान प्रोत्साहन राशि और अन्य योजनाओं का जिक्र किया जा सकता है । यहां बताते चले कि सौर एनर्जी को आगे बढ़ाने सब्सिडी और अन्य लाभ की घोषण के साथ ही कई कंपनियों ने अपने सोलर पैनल बाजार में उतारे हैं। यहां पर मुख्य समस्या लोगों केा सही उर पर अच्छा सोलर पैनल लगवाया जाए। ढांक के तीन पात वाली कहावत यहां चरितार्थ होती है।

सीधे-सीधे जेब पर डाका
आज वहीं हालात छत्तीसगढ़ की बिजली व्यवस्था में दिख रहे हैं। राज्य के सभी जिलों? रायपुर, बिलासपुर, कोरबा, दुर्ग, राजनांदगांव, जांजगीर-चांपा, महासमुंद, कांकेर, सरगुजा, बस्तर से लेकर अंबिकापुर और रायगढ़ तक? हर जगह लोग स्मार्ट मीटर और हाफ बिजली बिल योजना की समाप्ति से त्रस्त हैं। सरकार ने दावा किया था कि स्मार्ट मीटर से पारदर्शिता आएगी और बिजली चोरी रुकेगी। लेकिन जनता के अनुभव कुछ और कह रहे हैं। जिन घरों में पहले कम बिल आता था, अब उन्हीं घरों में दोगुना बिल आ रहा है। कहीं 24 घंटे बिजली भी नहीं मिलती, फिर भी मीटर रुकता ही नहीं। गरीब और मध्यम वर्ग के लिए यह सीधे-सीधे जेब पर डाका है।

भाषण और प्रचार से हल नहीं
हाफ बिजली बिल योजना, जिसने लाखों उपभोक्ताओं को राहत दी थी, उसे बिना सोचे-समझे खत्म कर दिया गया। अब मज़दूर, किसान, बेरोज़गार और छोटे व्यापारी? सभी परेशान हैं। सवाल यह है कि जब राज्य का बड़ा हिस्सा रोजगार, पानी और खेती की समस्याओं से जूझ रहा है. तो बढ़े हुए बिजली बिल कैसे चुकाएगा? सरकार जनता को मुफ्त अनाज, किसान सम्मान निधि, महिला योजनाएँ और धार्मिक आयोजनों के जरिए साधने की कोशिश कर रही है। लेकिन पेट और जेब की समस्या ऐसी है जिसे केवल भाषण और प्रचार से हल नहीं किया जा सकता।

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