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मंत्री का खाद्य अधिकारी पर इतना अनुराग क्यों?

विपक्ष मुद्दा उठाए तो सत्ता पक्ष के मंत्री प्रश्न का जवाब गोल गोल देते है,ये समझ में आता है। सत्ता पक्ष के ही निर्वाचित विधायक वह भी सुशांत शुक्ला जैसा विधायक प्रश्न उठाए तो सत्ता पक्ष में मुख्यमंत्री सहित संबंधित विभाग के मंत्री को बड़ी ही जिम्मेदारी से मुद्दे को समझना होगा चाहिए।

छत्तीसगढ़ के नए विधानसभा में पांच दिवसीय शीतकालीन अधिवेशन में सरकार के मंत्री अपने ही विधायकों के प्रश्नों में घिरते नजर आ रहे है। मंत्री सदन में कार्यवाही की घोषणा करने के बजाय दोषी अधिकारियों को बचाने लगे तो मंत्री खुद ही संदेह के घेरे में आ जाते है। बीते दिन भारतीय जनता पार्टी के तेज तर्रार विधायक, सुशांत शुक्ला ने खाद्य मंत्री दयाल दास बघेल से बिलासपुर जिले में सामान्य कार्डधारकों के गरीबी रेखा के कार्डधारकों में बदलने का मुद्दा उठाया। सुशांत शुक्ला इस मुद्दे को पहले भी उठाते आ रहे है। पिछली बार मुद्दा उठा था तो उच्च स्तरीय जांच की घोषणा खाद्य मंत्री द्वारा की गई थी।

मुद्दा ये है कि बिलासपुर जिले का तत्कालीन विवादास्पद खाद्य अधिकारी अनुराग सिंह द्वारा अवैध कमाई के लिए लगभग ढाई सौ सामान्य कार्ड धारकों के राशन कार्डों को अपने मॉड्यूल के माध्यम से पासवर्ड को बैतूल में ट्रांसफर कर गरीबी रेखा के राशन कार्डों में बदलवा दिया।ढाई सौ राशनकार्डो में एक सौ पांच क्विंटल चांवल, एक क्विंटल शक्कर सहित दो क्विंटल नमक का कोटा बनता है। राशन कार्ड धारक को मुफ्त में चांवल, साढ़े सत्रह सौ रुपए का शक्कर, चार सौ रुपए में नमक मिल जाता है। बाजार में राशन का चांवल 2200रुपए क्विंटल में बिकता है।

बिलासपुर में जो राशनकार्ड घोटाला हुआ है उसमें तत्कालीन खाद्य अधिकारी अनुराग सिंह भदौरिया को हर महीने एक लाख रुपए का भुगतान ढाई सौ फर्जी राशन कार्डों के एवज में मिलता था। अनुराग सिंह भदौरिया डंके की चोट पर बिलासपुर जिले के भाजपा विधायकों को ये बताता था कि कोई भी उसका कुछ बिगाड़ नहीं सकता क्योंकि उसके द्वारा मोटी राशि ऊपर पहुंचाई जाती है।

सुशांत शुक्ला विधानसभा में प्रमाणित तथ्यों के साथ प्रश्न उठाने वाले विधायक माने जाते है। सदन में खाद्य मंत्री के इस जवाब से कि प्रशासन ने एफआईआर कराई है।विधायक ने बताया कि जवाबदार तत्कालीन खाद्य अधिकारी अनुराग सिंह भदौरिया है ,इस पर मंत्री जवाब नहीं दे पाए। सुशांत शुक्ला ने इस मामले में भाजपा विधायकों का दल बनाकर जांच करवाने की मांग की है।

बिलासपुर के सूत्रों का कहना है कि खाद्य मंत्री नगरीय निकाय के अधिकारियों को जिम्मेदार बता रहे है जबकि जिन 250 सामान्य राशन कार्ड धारक का राशन कार्ड गरीबी रेखा में बदला गया है उसकी अनुशंसा नगरीय निकाय द्वारा नहीं की गई है। सत्ता पक्ष के विधायक ने आरोप लगाया है कि भ्रष्ट्राचार करने वाले तत्कालीन खाद्य अधिकारी अनुराग सिंह भदौरिया को मंत्री संरक्षण दे रहे है। पिछले विधान सभा सत्र में बैठाई गई विभागीय जांच समिति ने अभी तक कोई निष्कर्ष नहीं निकाला है। उल्टा बिलासपुर से हटा कर दुर्ग जिले में पदस्थ कर दिया गया है। अनुराग सिंह भदौरिया के ऊपर नारायणपुर में भी बोगस राधन कार्ड बनाकर चांवल उठवाने का आरोप लग चुका है।

रायपुर जिले में रहते हुए भी अनुराग सिंह भदौरिया ने एक निजी गैस कंपनी से लाखों रुपए की रिश्वत ली थी जिसकी ईओडब्ल्यू विभाग में शिकायत हुई थी।इसके चलते पूर्व शासन में इस अधिकारी को खाद्य संचालनालय अटैच कर दिया गया था। खाद्य संचालनालय में एक दैनिक वेतन भोगी वाहन चालक ने खाद्य संचालनालय के दो अधिकारी राजीव कुमार जायसवाल और अनुराग सिंह भदौरिया का नाम मृत्यु पूर्व कथन में लिख कर आत्म हत्या कर लिया था जिसकी न्यायालय में कार्यवाही प्रचलन में है

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