भैंसाझार चकरभाठा वितरक निर्माण में अनियमितता किए जाने पर कलेक्टर बिलासपुर के जांच में 5 अधिकारियों पर कार्यवाही के लिए राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा के विधानसभा में दिए गए आश्वासन में कहा गया था। केवल आनन्दरूप तिवारी , तत्कालीन अनुविभागीय अधिकारी राजस्व एवं भूअर्जन अधिकारी कोटा को निलंबित किया गया और पटवारी मुकेश साहू को बर्खास्त कर दिया गया। मामले में एक ही खसरे को अलग-अलग बता कर 3.42 करोड़ रुपए के मुआवजे के भुगतान का मामला था। बिलासपुर में उस समय कीर्तिमान राठौर एसडीओ राजस्व को बचाने के लिए दोबारा जांच का खेल खेला गया और केवल मुकेश साहू पटवारी संकरी को दूसरे जांच प्रतिवेदन अनुसार बर्खास्त कर दिया गया।
कांग्रेसी नेताओं ने 3.42 करोड़ रुपए में से आधा राशि झोरकर
सौरभ कुमार के जांच आदेश को रद्दी में डालकर दूसरे कलेक्टर अवनीश शरण से जांच कराई गई। अवनीश शरण ने चार अधिकारियों को क्लीन चिट देकर केवल पटवारी मुकेश साहू को बर्खास्त कर दिया। भाजपा के सत्ता में आते ही 3.42 करोड़ मुआवजे की राशि को लेकर हल्ला मचा तो इसी महीने के 3 जून 2025 को आनंदरूप तिवारी तत्कालीन अनुविभागीय अधिकारी राजस्व और भू अर्जन अधिकारी कोटा को निलंबित कर दिया गया। लेकिन तत्कालीन अनुविभागीय अधिकारी राजस्व और भू अर्जन अधिकारी कीर्तिमान राठौर को भी तत्काल निलंबित नहीं किया गया। जब विधानसभा में मंत्री ने आश्वासन दिया और परियोजना संचालित थी, उस समय भू-अर्जन अधिकारी के पद पर किर्तिमान राठौर ने भी कार्य किया।

मामले में वे उतने ही जिम्मेदार माने जाएंगे। बताया गया है कि कलेक्टर बिलासपुर ने पूरी जांच के बाद तथ्यों सहित इन अधिकारियों को दोषी बताया था। ऐसे में एक पर कार्रवाई न कर शासन ने मां और मौसी वाली कहावत को चरितार्थ किया है। यहां यह बता दे कि बिलासपुर जिले के मामले में मंत्री के कहने पर उन्हें छोड़ दिया गया है। अब फिर से विधानसभा का मानसून सत्र आने वाला है ।कांग्रेस विधायकों की नजर पूरे प्रकरण पर है। अगर यह उठा तो फिर से मंत्री को जवाब देना होगा। फिलहाल राजस्व विभाग में अविनाश चंपावत सचिव हैं। उनकी जानकारी में यह बात आती है तो पूरी रिपोर्ट का अवलोकन कर मामले मेंपूरी कार्रवाई को दुरुस्त करा सकते हैं। देखते हैं कि एक अफसर को छोड़ने के पीछे किसका हाथ है।
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