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सिकासार-कोडार के टेंडर में बड़ी राहत, हाईकोर्ट ने खारिज की चुनौती DBL के L-1 होने पर लगी मुहर, हाईकोर्ट ने खारिज किया दूसरी कंपनी की याचिका

रायपुर: सिकासार-कोडार इंटरलिंकिंग परियोजना के लगभग 2524 करोड़ रुपए के टेंडर को लेकर चल रही खींचतान में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। टेंडर की पात्रता और प्रक्रिया को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट पहुंची कंपनी की याचिका खारिज हो गई है। परियोजना में दिलीप बिल्डकॉन लिमिटेड (डीबीएल) 2524.32 करोड़ रुपए की बोली के साथ एल-1 घोषित हुई थी। इसके बाद तकनीकी पात्रता में बाहर हुई कंपनी ने टेंडर प्रक्रिया को अदालत में चुनौती दी थी। अब याचिका खारिज होने के बाद फिलहाल विभाग की टेंडर प्रक्रिया और डीबीएल की एल-1 स्थिति को कानूनी राहत मिली है।

यह वही मामला है जिसमें पात्रता की कड़ी शर्तों, अनुभव और वित्तीय क्षमता को लेकर विवाद खड़ा हुआ था। विभाग का पक्ष था कि करीब ढाई हजार करोड़ की इस परियोजना के लिए पर्याप्त तकनीकी अनुभव और वित्तीय क्षमता वाली एजेंसी जरूरी है। सिकासार-कोडार लिंक परियोजना में औसत टर्नओव्हर दूगुना का प्रावधान किया गया है। उदाहरण के तौर पर उक्त संबंध में केन-बेतवा लिंक परियोजना का निविदा जो भारत सरकार के जल शक्ति विभाग के द्वारा जारी किया गया था। जिसमें औसत टर्नओव्हर 2.50 गुना का प्रावधान किया गया था। जिसके अतिरिक्त अन्य कार्य में भी 2 से 2.50 गुना तक प्रावधान किया गया था। अतः सिकासार-कोडार लिंक परियोजना में स्वस्थ्य प्रतिस्पर्धा बढ़ाने एवं सक्षम निविदाकार प्राप्त करने के उद्देश्य से 2 गुना प्रावधान किया गया था।

निविदा समिति ने पाया था योग्य
दिलीप बिल्डाकॉन सिकासार-कोडार लिंक परियोजना में दर खुलने के पश्चात् एल-1 जारी किया गया। उक्त दर खोलने के पूर्व निविदा समिति द्वारा पी-क्यू परीक्षण में यह पाया गया कि उनके द्वारा समान कार्य का प्रमाण-पत्र प्रस्तुत किया गया था। शासकीय कार्यालय से जारी किये गये प्रमाण-पत्र को पुुनः सत्यापित करने हेतु उक्त विभाग को भेजा गया। उक्त कार्यालय द्वारा भौतिक एवं वित्तीय रूप से दिलीप बिल्डकॉन को जारी किये गये प्रमाण-पत्र को सही बताया था। निविदा निराकरण समिति द्वारा उक्त निविदाकार को योग्य घाेषित किया गया।

निविदा प्रक्रिया में हस्तक्षेप से इंकार
जल संसाधन विभाग की महत्वाकांक्षी परियोजना को लेकर हाईकोर्ट ने सिकासार-कोदार लिंक परियोजना से जुड़ी याचिका खारिज करते हुए सरकार की निविदा प्रक्रिया में हस्तक्षेप से साफ इनकार कर दिया है। अदालत ने माना कि टेंडर प्रक्रिया में किसी प्रकार की गडबड़ी, मनमानी या दुर्भावना साबित नहीं हुई, जिसके आधार पर न्यायिक हस्तक्षेप किया जाए। टेंडर की शर्ते तय करना सरकार और निविदा प्राधिकरण का अधिकार है।

अनिल चंदेल और सुनील अग्रवाल की साजिश बेनकाब
विष्णुदेव साय सरकार के खिलाफ जल संसाधन विभाग की महत्वाकांक्षी परियोजना को लेकर ‘हजारों करोड़ के घोटाले’ का शोर मचाने वालों को मंगलवार को करारा झटका लगा। बिलासपुर हाईकोर्ट ने सिकासार-कोदार लिंक परियोजना से जुड़ी याचिका खारिज करते हुए सरकार की निविदा प्रक्रिया में हस्तक्षेप से साफ इनकार कर दिया। हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई है कि जल संसाधन विभाग में कथित “ढाई हजार करोड़”, “चार हजार करोड़” के घोटाले का नैरेटिव खड़ा कर सरकार और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की छवि पर हमला करने की कोशिश करने वाल अनिल चंदेल और सुनील अग्रवाल की साजिश हुआ बेनकाब।

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