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19 साल जेल में रहने के बाद रिहा हुआ निठारी कांड का आरोपी सुरेंद्र कोली, हरिद्वार में मौत; आत्महत्या की आशंका

Surendra Koli sucide : उत्तर प्रदेश के नोएडा के चर्च‍ित निठारी कांड के आरोपी सुरेंद्र कोली ने आत्‍महत्‍या कर ली है. कोली को पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट फ‍िर सुप्रीम कोर्ट से भी उसे बरी कर द‍िया गया था. जेल से र‍िहा होने के बाद से ही वह हरिद्वार में रह रहा था. जहां उसने फांसी लगाकर आत्‍महत्‍या कर ली है. नि‍ठारी कांड मामले वह करीब 19 साल जेल में रहा था. इसके बाद नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट से आखिरी मामले में बरी होकर वह बाहर आया था.

सुरेंद्र कोली का शव हरिद्वार के भूपतवाला इलाके में एक मंदिर के सामने चाय के खोखे पर फंदे से लटका मिला है. शव की जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर मामले की जांच शुरू कर दी है. अब तक जो जानकारी सामने आ रही है. उसके मुताब‍िक कोली प‍िछले कुछ महीनों से हरिद्वार में ही रह रहा था. वह मूल रूप से उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के भिकियासैंण क्षेत्र का रहने वाला था.

पुलिस की मानें तो अब सुरेंद्र के शव के आसपास से कोई भी सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है. यही वजह है कि मौत के पीछे की सही वजह पोस्टमार्टम के बाद ही पता चल सकेगी.

सुरेंद्र कोली को 13 मामलों में मिली थी मौत की सजा
सुरेंद्र कोली को निचली और ऊपरी अदालतों को मिलाकर 13 मामलों में मौत की सजा सुनाई गई थी. इसके साथ ही उसका नाम नोएडा के निठारी केस में भी सामने आया था. पूरा मामला साल 2005-06 के बीच का था. जब अचानक वहां रहने वाले कुछ बच्चे और महिलाएं गायब होने लगी थी. इसके बाद 29 दिसंबर 2006 को जिस कोठी में सुरेंद्र कोली रहा करता था. उसी के पास मौजूद नाले के पास ने मानव अवशेष मिलने लगे थे. जिसके बाद पूरे मामले की जांच सीबीआई ने की थी.

हालांकि इन सब मामलों में मौत की सजा सुनाए जाने के बाद भी साल 2023 में उसे इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 12 मामलों में बरी कर द‍िया था. इसके बाद आखिरी बचे मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 2025 में बरी कर द‍िया था. इसके बाद ही वह जेल से बाहर आया था.

कोर्ट के फैसले पर उठे थे सवाल
कोर्ट के इस फैसले के बाद कोर्ट ने ही उसकी क्यूरेटिव पिटीशन मंजूर कर ल‍िया था. जिसमें कहा कि वह किसी दूसरे मामले में वांछित नहीं है तो उसे तत्काल रिहा किया जाए. इससे उसके खिलाफ निठारी कांड से जुड़े सभी आपराधिक मामले बंद हो गए थे. जब कोर्ट ने यह फैसला सुनाया था. उस समय इस तरह के फैसले को लेकर कई तरह के सवाल खड़े हुए थे.

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