खाद्य संचालनालय के एनआईसी बना भ्रष्ट्राचार का अड्डा

खाद्य विभाग का राष्ट्रीय सूचना केंद्र याने NIC विवादों का अड्डा बन गया है। छत्तीसगढ़ के भूतपूर्व मुख्यमंत्री डा रमन सिंह द्वारा विधान सभा में 600 करोड़ रुपए के राशन घोटाले का मामला उठाया था। खाद्य संचालनालय तत्कालीन अपर संचालक के निर्देश पर अरबों रुपए के चांवल को तकनीकी त्रुटि बताकर करोड़ो रुपए का भ्रष्ट्राचार कर चुका है। बताया जाता है कि सितंबर 2022 में राज्य के राशन दुकानों में 6 अरब का चांवल खाद्य निरीक्षकों के द्वारा भरे गए घोषणा पत्र के अनुसार दिख रहा था। अपर संचालक पर घोटाले का आरोप लगाते ही चांवल की मात्रा को कम करने के लिए चार खेल खेले गए। पहला, आर आर सी जारी करवाया गया।

दूसरा राशन दुकानों से बाजार से खरीदवा कर बोगस रूप से रखवाया गया। तीसरा राशन दुकानों के कमीशन की राशि काट ली गई। चौथा, तकनीकी त्रुटि बता कर अरबों का चांवल एनआईसी ने तकनीकी त्रुटि बताकर साफ्टवेयर से राशन दुकानों के चांवल की मात्रा घटा दी गई। खाद्य संचालनालय के अधिकारी कितना भ्रष्ट्राचार किए है इसका प्रमाण है कि एक प्रोग्रामर को सरकारी कार दिया गया है। जिससे वो दुर्ग जिले से आना जाना करती है। जबकि संचालनालय के बड़े अधिकारी को कार नहीं दी गई है।

खाद्य संचालनालय के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि खाद्य संचालनालय से राशन दुकानदारो को निर्देश था कि सर्वर डाउन होने या तकनीकी कारण से वितरण प्रभावित होने पर ऑफ लाइन वितरण रजिस्टर में किया जाएगा।जब सर्वर ठीक हो जाए तो ऑन लाइन एंट्री की जाए। इसका पालन होने के बावजूद तकनीकी त्रुटि बता कर घोटाले को दबाने की कोशिश की गई है। उपभोक्ता संरक्षण से जुड़े संस्थाओं ने इस बात की जानकारी विधानसभा जांच समिति को देकर जांच की मांग की है। विधानसभा में धरम लाल कौशिक के तारांकित प्रश्न के जवाब में तकनीकी त्रुटि को छोड़ कर दो अरब के चांवल घोटाले को स्वीकार किया गया है। तकनीकी त्रुटि में चार अरब का चांवल घोटाला होना बताया जा रहा है।

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