देश के एक सौ पैतालीस करोड़ दर्शकों के लिए विभिन्न भाषा में दीर्घ काल मनोरंजन करने वालो को फिल्म पुरुष पुरोधा दादा साहेब फाल्के के नाम पर राष्ट्रीय पुरस्कार1969से देने की परंपरा भारत सरकार ने शुरू किया।इस साल मलयालम फिल्म के मशहूर अभिनेता मोहनलाल को दादा साहेब फाल्के पुरस्कार से नवाजा गया है।दक्षिण की फिल्मों में अभिनय करने वाले नायकों की एक बात मुझे हमेशा अच्छी लगती है कि वे अपना असली नाम के बदले चलताऊ नाम नहीं रखते।
अब मोहन लाल को ही ले लीजिए ये नाम पहले स्ट्रोक में महात्मा गांधी का नाम के समांतर लगता है, वे मोहन दास थे ये मोहन लाल है। मोहन लाल मुख्यत: मलयालम भाषी अभिनेता रहे लेकिन तमिल, कन्नड़ फिल्मों में भी उन्होंने अपनी छाप छोड़ी। हिंदी फिल्मों में वे शोले की रीमेक राम गोपाल वर्मा की “आग” फिल्म में संजीव कुमार की भूमिका अभिनीत किए थे।
मोहनलाल 1986 से दक्षिण फिल्म इंडस्ट्री के महत्वपूर्ण नायक है जिन्हें दो बार सर्वश्रेष्ठ अभिनेता एक एक बार सर्वश्रेष्ठ फिल्म और जूरी अवॉर्ड पा चुके है। देश के नागरिक अलंकरण पुरस्कार में वे पद्म श्री और पद्म भूषण पुरस्कार से सम्मानित है। यदि आप सब टाइटल के साथ मोहनलाल की फिल्म देखना चाहे तो वाना प्रस्थम, थिरोनोट्टम, राजविंतेमकन, तुवालतुम्बिकल, कीरिडम देख सकते है। मुझे सेल्युलर जेल पर बनी फिल्म “काला पानी” जिसे प्रियदर्शन ने बनाई थी, बहुत अच्छी लगी थी।
दादासाहेब फाल्के पुरस्कार के 55विजेताओं में मोहम्मद रफी, किशोर कुमार और मुकेश का नाम न होना खलता है। इस सूची में शिवाजी गणेशन औऱ रेखा (पिता – पुत्री की जोड़ी) औऱ पृथ्वीराज कपूर और राजकपूर- शशिकपूर (पिता- पुत्र) विलक्षण संयोग है। जिन लोगो को दादा साहेब फाल्के पुरस्कार मिला है उनके नाम इस प्रकार है:-
नायक–
- पृथ्वीराज कपूर(मरणोपरांत),(1971)
- सोहराब मोदी(1979)
- पी. जयराज(1980)
- राजकपूर(1987)
- अशोक कुमार (1988)
- ए. नागेश्वर राव(1990)
- दिलीप कुमार( 1994)
- राजकुमार(दक्षिण)(1995)
- शिवाजी गणेशन( 1996)
- देवानंद (2002)
- सौमित्र चटर्जी( 2011)
- प्राण (2012)
- शशि कपूर (2014)
- मनोज कुमार( 2015)
- विनोद खन्ना(2017)
- अमिताभ बच्चन( 2018)
- रजनीकांत (2019)
- मिथुन चक्रवर्ती (2024)
- मोहन लाल(2025)
नायिका
- देविका रानी (1969)
- रूबी मेयर्स सुलोचना (1973)
- काननदेवी (1976)
- दुर्गा खोटे (1983)
- आशा पारेख (2020)
- रेखा (2022)
- वहीदा रहमान (2023)
निर्देशक
- बी. नरसिम्हा रेड्डी (1974)
- धीरेंद्र गांगुली(1975)
- नितिन बोस(1977)
- एल .वी. प्रसाद(1982)
- सत्यजीत रे(1984)
- शांताराम(1985)
- बी . जी. पेंढारकर(1991)
- भूपेन हजारिका
- बी . आर. चोपड़ा(1998)
- ऋषिकेश मुखर्जी(1999)
- यश चोपड़ा(2001)
- मृणाल सेन(2003)
- अदूर गोपाल कृष्णन(2004)
- ब्रज भूषण चतुर्वेदी(2005)
- श्याम बेनेगल(2006)
- के. बालाचंदर (2010)
- के. विश्वनाथ(2016)
निर्माता
- वीरेंद्र नाथ सरकार(1970)
- बी. नागिरेड्डी(1986)
- डी. रामानायडू(2009)
गायक
- मन्ना डे(2007)
गायिका
- लता मंगेशकर(1989)
- आशा भोसले(2000)
गीतकार
- मजरूह सुल्तानपुरी(1993)
2.प्रदीप(1997)
3.गुलज़ार(2013)
संगीतकार
- पंकज मलिक(1972)
- रामचंद्र बोराल(1978)
- नौशाद(1981)
फिल्म फोटोग्राफर
- बी.के. मूर्ति
इस सूची में प्राण ऐसे अनोखे कलाकार है जो खलनायक के रूप में स्थापित रहे थे। मनोज कुमार ने उपकार में उन्हें चरित्र भूमिका में लेकर आये। आगे चलकर वे चरित्र भूमिका में दिखे लेकिन एक खलनायक को उसके अभिनय के बल पर 55 दिग्गजों के बीच जगह मिले, ये सबसे अलग बात है।
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