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रूस पर अमेरिकी सीनेट का बड़ा एक्शन! भारत-चीन पर 100% टैरिफ का रास्ता साफ, अब ट्रंप के हाथ में फैसला

US Sanctions Bill: रूस के खिलाफ अमेरिका की नई रणनीति में भारत और चीन समेत उन देशों पर भी आर्थिक दबाव बढ़ाने की तैयारी है. अमेरिकी सीनेट ने रूस और ईरान से जुड़े नए प्रतिबंधों वाले विधेयक को भारी बहुमत से मंजूरी दे दी है. ब‍िल के पक्ष में 86 सीनेटरों ने मतदान किया, जबकि 11 ने इसका विरोध किया.

विधेयक का नया नाम ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026’ रखा गया है. इसे पूर्व रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम और डेमोक्रेटिक सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने आगे बढ़ाया था. ग्राहम की पिछले महीने अचानक मृत्यु हो गई थी.

भारत और चीन 100 प्रतिशत टैरिफ की तैयारी
प्रस्ताव में अमेरिकी राष्ट्रपति को उन देशों से आने वाले उत्पादों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार देने की बात कही गई है, जो रूस के प्रमुख तेल और गैस खरीदार हैं. इस सूची में भारत और चीन जैसे बड़े ऊर्जा आयातक शामिल हैं.

प्रस्ताव के पीछे अमेरिकी सांसदों का तर्क है कि रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर आर्थिक दबाव बढ़ाकर मॉस्को की तेल और गैस से होने वाली आय को प्रभावित किया जा सकता है. इससे रूस पर यूक्रेन युद्ध समाप्त करने के लिए दबाव बढ़ाने की कोशिश की जाएगी.रूस के प्रमुख ऊर्जा खरीदारों में चीन और भारत के अलावा अजरबैजान, हंगरी और स्लोवाकिया का भी नाम लिया गया है.

अभी कानून नहीं बना
सीनेट से मंजूरी मिलने के बावजूद यह प्रस्ताव अभी अमेरिकी कानून नहीं बना है. अब इसे प्रतिनिधि सभा यानी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में भेजा जाएगा.हालांकि, मौजूदा कांग्रेस अवकाश के कारण हाउस में इस पर तत्काल मतदान की संभावना नहीं है.प्रतिनिधि सभा की बैठक 31 अगस्त से दोबारा शुरू होने की उम्मीद है. सितंबर की शुरुआत से पहले इस विधेयक पर वोटिंग होने की संभावना कम बताई जा रही है.

पुतिन और रूसी सैन्य नेतृत्व पर भी कार्रवाई
प्रस्ताव सिर्फ आर्थिक प्रतिबंधों तक सीमित नहीं है.इसमें रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और देश के वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के खिलाफ नए प्रतिबंध लगाने का प्रावधान भी है.इसके साथ वीजा प्रतिबंधों का इस्तेमाल करने की बात कही गई है.

विधेयक में रूसी निर्यात से जुड़े सामान पर 500 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का प्रावधान भी शामिल है.यानी रूस के खिलाफ प्रस्तावित आर्थिक कार्रवाई का दायरा काफी व्यापक रखा गया है. स कानून में रूस के साथ-साथ ईरान के खिलाफ भी प्रावधान हैं.ईरान के ऊर्जा क्षेत्र में निवेश करने वाली कंपनियों पर दंडात्मक कार्रवाई का प्रस्ताव रखा गया है.

भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?
अगर यह विधेयक अमेरिकी प्रतिनिधि सभा से भी पारित होकर कानून बन जाता है और राष्ट्रपति इसका इस्तेमाल करते हैं, तो भारत से अमेरिका जाने वाले कुछ सामान पर भारी अतिरिक्त शुल्क लगाया जा सकता है.इसका असर दोनों देशों के व्यापार और उन भारतीय कंपनियों पर पड़ सकता है, जिनका अमेरिकी बाजार पर कारोबार निर्भर है.

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