पाकिस्तान से खेलने का मतलब, सर झुकाना ही है।

अभी ज्यादा दिन नहीं बीते है पहलगाम घटना को और पाकिस्तान के आतंकवादी अड्डों पर हमला हुए। भारत सरकार ने भारतीय क्रिकेट टीम को एशिया कप में पाकिस्तान के साथ टी ट्वेंटी टूर्नामेंट खेलने भेज दिया। खेल तभी अच्छे लगते है, जब किसी देश की भावना भी बेहतर हो। संप्रदाय के आधार पर देश के विभाजन का दंश आज तक लोग भुगत रहे है। खासकर कश्मीर के हिंदू लोग। सत्ता के लोभ में बंटवारा चाहने वालों की नादानी के चलते भारत या हिंदुस्तान ने ऐसा स्थाई नासूर पाला है कि पाकिस्तान अश्वत्थामा का घाव बन गया है।सीमा पार से हथियार, नशीले पदार्थ और आतंकवादी देश से घुसपैठ करने वाले देश के साथ जब जब भारत ने संबंध बनाने का लल्लो चप्पो किया है, नुकसान भारत का हुआ है।

आखिरकार इतनी बेबसी क्यों रही है भारत में सत्ता सम्हालने वालों में कि घूम फिर कर पाकिस्तान से दोनों देशों से बाहर क्रिकेट खेलने पहुंच जाते है। एक देश के साथ न खेलने से ज्यादा से ज्यादा क्या होगा? एक दो स्पर्धा में चैंपियन नहीं बनेंगे।दम होगा तो एक मैच में वॉकओवर देकर भी विजेता बन जाएंगे। इससे ज्यादा और कुछ हासिल होना नहीं है और करना भी नहीं है। याद दिलाते चले कि भारत पाकिस्तान से अठारह साल पहले 8दिसम्बर 2007को आखिरी टेस्ट खेला है। पाकिस्तान तो खेलने के लालच में दर दर भटक रहा है। उनके साथ उनके देश में ही खेलने वाले देश नहीं मिलते है। अगर पाकिस्तान के साथ वन डे और टी ट्वेंटी वाला संबंध भी तोड़ दे तो नुकसान खास नहीं होने वाला लेकिन सच्चे हिन्दुस्तानियों के दिल को तसल्ली मिलेगी कि देश की सरकार का रुख साफ है।दोहरा चरित्र लुझ्झड़पना है।

एक तरफ पाकिस्तान को दुश्मन देश मान कर आपरेशन सिंदूर चला रहे है(ये ऑपरेशन स्थगित है, ऐसा कहा गया है) दूसरी तरफ बल्ला पकड़े तीसरे देश में क्रिकेट खेल रहे है। बड़ी शर्मनाक स्थिति है। मुझे याद आता है कि वानखेड़े स्टेडियम मुंबई की पिच में पाकिस्तान को न खेलने देने के नाम पर शिवसेना ने पिच खोद दिया था। विरोध ऐसा होना चाहिए।

वैसे भी भारत के पाकिस्तान के साथ किसी भी प्रकार के संबंध ठीक नहीं रहे है। 1965 से 1978 तक दोनों देश एक दूसरे के साथ टेस्ट क्रिकेट नहीं खेले। जनता पार्टी और भारतीय जनता पार्टी ने ही 1978 और 2004 ने क्रिकेट संबंध की शुरुआत की थी।हाथ क्या लगा? कश्मीर में आतंकवाद, मुंबई में आतंकवादी हमला, देश के अलग अलग हिस्सों में सांप्रदायिक दंगे, पहलगाम में सामूहिक नर संहार वो भी धर्म पूछ कर? लानत है देश की सरकार पर जो इतने के बावजूद क्रिकेट खेलने की लिए टीम भेजी है। सोचिए जिस देश के साथ 75 साल में आपने केवल 59 टेस्ट,136 वनडे और सिर्फ 13टी ट्वेंटी मैच खेले हो उस देश के साथ आगे किसी भी प्रकार का खेल संबंध रखने की जरूरत क्या है।

Check Also

MP News: जूनियर डॉक्टरों और इंटर्न के लिए खुशखबरी, स्टाइपेंड में हुई बढ़ोतरी, अब हर महीने मिलेंगे इतने रुपये

MP News: मध्यप्रदेश के जूनियर डॉक्टरों और इंटर्न को सरकार की तरफ से बड़ी खुशखबरी …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *