अगर आप बार-बार ट्रैफिक नियम तोड़ते हैं और चालान नहीं भरते, तो संभल जाइए. दिल्ली में ट्रैफिक नियमों को लेकर अब सख्ती और बढ़ने वाली है. दिल्ली सरकार जल्द मोटर वीकल एक्ट में बदलाव से जुड़ा नोटिफिकेशन जारी करने वाली है. जिसके अनुसार, तय समय में चालान न भरने पर गाड़ी का PUC, FASTag और इंश्योरेंस रिन्यू नहीं हो पाएगा. इतना ही नहीं, एक साल में 5 चालान पर ड्राइवर का लाइसेंस भी सस्पेंड किया जा सकता है. ये जानकारी दिल्ली पुलिस के स्पेशल कमिश्नर (ट्रैफिक) नीरज ठाकुर ने ‘जाम के खिलाफ जंग’ सीरीज के तहत हुए ‘NBT संवाद’ में दी.
नियम तोड़ने वालों पर लगेगी लगाम
उन्होंने कहा कि इस कदम से नियम तोड़ने वालों पर लगाम लगेगी. केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय 2026 में इस संबंध में नोटिफिकेशन जारी कर चुका है. अब दिल्ली सरकार सख्ती से नियम लागू करेगी. नोएडा, गुड़गांव और फरीदाबाद से भी लोग गाड़ी से दिल्ली आते हैं. उन पर भी इसका असर होगा. यह सख्ती सिर्फ दिल्ली तक सीमित नहीं रहेगी. नोएडा, गुरुग्राम और फरीदाबाद जैसे NCR शहरों से रोज आने-जाने वाले वाहन चालकों पर भी इसका असर पड़ेगा. यानी पूरे NCR में ट्रैफिक नियमों को नजरअंदाज करना अब आसान नहीं रहेगा.
जीरो पेनल्टी में निपटाए गए 52 फीसदी चालान
इसलिए जुर्माना नहीं भरते लोग नियम तोड़ने वाले कोर्ट में चालान भरने को प्राथमिकता क्यों देते हैं. इस सवाल पर स्पेशल सीपी (ट्रैफिक) ने कहा, ‘विश्लेषण में सामने आया कि हलिया लोक अदालतों में करीब 52 फीसदी चालान ‘जीरो’ जुर्माने पर निपटाए गए हैं. बाकी हर चालान पर औसतन 156 रुपये फाइन लगा. दिल्ली हाई कोर्ट की कमिटी इसकी निगरानी करती है. उसे संबंधित डेटा भेजा जाता है.
लोक अदालत के ‘शॉर्टकट’ पर लगेगी रोक
अभी तक कई लोग चालान भरने से बचते थे और लोक अदालत का इंतजार करते थे, जहां अक्सर कम जुर्माने में मामला निपट जाता था. आंकड़ों के मुताबिक, करीब 52 फीसदी मामलों में चालान बिना जुर्माने के ही खत्म हो गए थे. इसी वजह से लोग सीधे भुगतान करने से बचते थे. अब सरकार इस लूपहोल को खत्म करना चाहती है ताकि लोग नियमों को गंभीरता से लें और चालान टालने की आदत खत्म हो.
सरकार का साफ कहना है कि जब तक नियम तोड़ने पर सख्त कार्रवाई नहीं होगी, तब तक लोग ट्रैफिक नियमों को हल्के में लेते रहेंगे. नए नियमों का उद्देश्य यही है कि लोग छूट का इंतजार करने के बजाय समय पर नियमों का पालन करें.
INDIA WRITERS Voices of India, Words That Matter