भारतीय जनता पार्टी के राज्य में सत्ता में आए बीस माह होने जा रहे है। इन बीस महीनों में इकलौती उपलब्धि ये ही दिख रही है कि कांग्रेस शासनकाल के घोटाले की परते प्याज के छिल्कों के समान खुलते जा रहे है। पूर्व मुख्यमंत्री के छोड़ घोटाले में शामिल लोगों को चुन चुन कर खोजा जा रहा है पकड़ा जा रहा है। कोयला और शराब घोटाले में केंद्रीय जांच एजेंसियो ने इतनी पकी पकाई रोटी दे रखी है कि बस कुछ मत करो। बस लीड के देखो और उठा लाओ।राज्य की जांच एजेंसी ने इन घोटालों में जितने लोगों को पहले ही पकड़ रखा था उन्हीं को फिर से पकड़ा जा रहा है।
नए आरोपियों की संख्या बहुत कम है। चलो कुछ नहीं सही तो ये सही। इन घोटालों से परे छत्तीसगढ़ राज्य से पैसे बाहर जाने और भीतर आने का अलग खेल चल रहा है। बीते चार पांच महीने में राज्य की पुलिस ने दस किलोमीटर के दो थाने क्षेत्र में अलग अलग करोड़ो रुपए जप्त किए जाने का मामला सामने आया। रायपुर जिले में नए नवेले आईपीएस अधिकारी ने आधे पैसे को बाहर ही बाहर करने की कोशिश की थी लेकिन खबरीलाल ने पुलिस में भी मुखबिरी ऐसी किया कि दोबारा जांच का खेल खेल कर बाकी करोड़ो रुपए को जप्त करने का खेल दिखाना पड़ा।
इस बार का मुखबिर रायपुर पुलिस के कारनामे से वाकिफ था सो इस बार मुखबिरी दुर्ग जिले में हुई और थाना चुना पुराने मुख्यमंत्री के क्षेत्र दुर्ग के पाटन विधानसभा को चुना। इसका कारण भी था कि इस बार अगर पुलिस वाले चाल चले तो राजनीति को घुसा देंगे। दोनों घटना में अनोखी समानता है। जप्त होने वाली राशि लगभग समान है। बताया ये जा रहा है कि पैसा हवाला का था। प्रश्न ये भी उठता है कि आखिर ये पैसा किसके लिए, कहां से लाए जा रहे थे? विश्वस्त सूत्रों के अनुसार एक महत्वपूर्ण व्यक्ति जो मुख्य मंत्री कार्यालय में पर्दे के पीछे से सरकारी महकमे और संगठन नियुक्ति में हस्तक्षेप कर रहा है सफल हो रहा है, उसके नजदीकी के मोबाइल में हवाला राशि के भुगतान के लिए पांच सौ रुपए के नंबर की फोटो थी। जैसे ही घटना की खबर वायरल हुई।
मोबाइल को नष्ट कर दिया गया है। राशि लेकर आने वालों को रायपुर जिले की सीमा के भीतर आने पर कहां राशि छोड़नी है इसका खुलासा होता लेकिन दुर्ग पुलिस ने बाजी मार ली. रायपुर से दीगर राज्यों में सरकारी वाहन बेरोकटोक जा रहे है। क्यों जा रहे है, कहां जा रहे है, इनको क्यों रोका नहीं जा रहा है।जांच का विषय है। राज्य में पहले ढाई साल खींचो खींचो चल रहा है। सत्ता में पुराने नए के बीच इतनी दरार बढ़ गई है कि हर कोई सामने वाले को सरे आम नंगा करने पर तुले है। इस लड़ाई का सबसे बड़ा सूत्राधार महानदी भवन के मुख्य कार्यालय में कुंडली जमाए बैठा है। प्रधान मंत्री के चेतावनी के बावजूद रवि,को ग्रहण नहीं लग रहा है।
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