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डोनाल्ड ट्रंप को सता रहा मौत का डर? चीन दौरे से पहले लिखी चिट्ठी में क्‍या-क्‍या राज

Donald Trump secret letter: अमेरिका के राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप इस समय चीन दौरे पर हैं. लेकिन उनके चीन दौरे से ज्यादा चर्चा उनकी एक चिट्टी की हो रही है. ऐसा कहा जा रहा है कि चीन दौरे से पहले ट्रंप ने एक एक गोपनीय पत्र तैयार कराया था. खास बात यह है कि यह पत्र किसी सामान्य राजनीतिक संदेश के लिए नहीं, बल्कि उस स्थिति के लिए था जब अमेरिका अचानक बड़े संकट में फंस जाए, उस समय उत्तराधिकारी चयन में कोई समस्या न आए. इसी को लेकर इस तरह की चिट्ठी ट्रंप की तरफ से तैयार की गई है.

सूत्रों के मुताबिक, व्हाइट हाउस ने चीन यात्रा को सिर्फ कूटनीतिक दौरा नहीं माना, बल्कि उसे वैश्विक तनाव के बीच एक संवेदनशील मिशन की तरह देखा है. यही वजह है कि ट्रंप प्रशासन ने बैकअप प्लान तैयार रखा था. बताया जा रहा है कि उस सीक्रेट लेटर में ऐसे निर्देश थे जिन्हें केवल राष्ट्रीय आपातकाल जैसी स्थिति में ही खोला जाना था.

रिपोर्ट्स में कहा गया है कि अमेरिका और चीन के बीच पिछले कुछ समय से व्यापार, टेक्नोलॉजी और सुरक्षा को लेकर तनाव बना हुआ है. ऐसे माहौल में जेडी वेंस की यात्रा को काफी अहम माना जा रहा था. व्हाइट हाउस को आशंका थी कि यदि दौरे के दौरान कोई बड़ा भू-राजनीतिक संकट खड़ा हो जाए, तो अमेरिका की सत्ता और सुरक्षा व्यवस्था पर तुरंत फैसले लेने पड़ सकते हैं.

ट्रंप ने अपने पत्र में क्या लिखा?
बताया जा रहा है कि इस पत्र में संवेदनशील रणनीतिक निर्देश, संपर्क प्रक्रिया और आपात स्थिति में प्रशासनिक कदमों से जुड़ी बातें शामिल थीं. इस पत्र में वो सब लिखा गया है कि अगर किसी आपातकालीन परिस्थिति में उन्हें कभी राष्ट्रपति के रूप में उनका उत्तराधिकारी बनने की आवश्यकता पड़े तो वे उनका पालन कर सकें.व्हाइट हाउस में ट्रंप के डिप्टी असिस्टेंट सेबेस्टियन गोर्का ने हाल ही में एक पॉडकास्ट में कहा कि रेसोल्यूट डेस्क की दराज में एक पत्र है जो उपराष्ट्रपति के लिए ही है. अगर ट्रंप को कुछ हो जाता है तो यह चिट्ठी उन्हें भेजी जाएगी.

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप को कई बार जान से मारने की धमकियां मिल चुकी हैं, इसके साथ ही हाल में ही ड‍िनर के दौरान फायरिंग की घटना भी सामने आई थी. यही वजह है कि इस पत्र को भविष्य की तैयारी माना जा रहा है.

क्‍या मानते हैं विशेषज्ञ?
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम दिखाता है कि अमेरिका अब चीन से जुड़े हर बड़े राजनयिक कार्यक्रम को केवल विदेश नीति के नजरिए से नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी देख रहा है. यही वजह है कि उच्च स्तर की यात्राओं के साथ अब इमरजेंसी प्रोटोकॉल भी पहले से कहीं ज्यादा मजबूत किए जा रहे हैं.

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