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नगर निगम के पूर्व महापौर और सभापति प्रमोद दुबे और कुत्ता

देश भर में आवारा कुत्ते बहुत बड़ी समस्या है। इसका पता इस बात से चलता है कि देश की सबसे बड़ी न्यायालय ने सभी राज्य के मुख्य सचिवों को सशरीर बुलाया गया। एयरपोर्ट,रेलवे बस स्टेशन सहित स्वास्थ्य केंद्रों और शिक्षण संस्थाओं को प्रमुख रूप से कुत्ता मुक्त बनाने के लिए समय सीमा तय कर दी गई है। स्कूल कॉलेज में प्रिंसिपल सहित गुरु जी लोगों को जिम्मेदारी दी गई है।

इस बात से बेखबर कंकाली अस्पताल ब्रह्माणपारा रायपुर के पास एक अज्ञात कुत्ते ने नगर निगम के पूर्व महापौर और सभापति प्रमोद दुबे के बेटे को काट दिया। पालतू कुत्ते तो अपने मालिक सहित उसके परिवार के सदस्यों को जान भी लेते है लेकिन आवारा कुत्ते इतने लोगों को देखते है कि वे किंचित विमूढ़ हो जाते है कि सामने वाला बंदा कौन है। अगर कुत्तों में इतनी समझ होती कि वे जान पाते कि किन व्यक्तियों के परिवार के सदस्यों को नहीं काटना है तो कम से कम वे राजनीतिज्ञों के परिवार के सदस्यों को नहीं काटते। पूर्व महापौर और सभापति प्रमोद दुबे के बेटे को जिस कुत्ते ने काटा है वह प्रमोद दुबे के जन्मस्थली ब्रह्माणपारा का ही कुत्ता है , यहां पर तीसरी चौथी मंजिल में कंकाली अस्पताल भी है। कुत्ता सुंदर नगर का नहीं है जहां प्रमोद दुबे वर्तमान में रहते है।

रायपुर का हर वार्ड आवारा कुत्तों से भरपूर है।हर साल 50- 60बढ़ जाते है। नगर निगम जिसके प्रमोद दुबे महापौर और सभापति भी रहे है,उसी नगर निगम का जिम्मा है कि नगर निगम क्षेत्र में कुत्तों की बढ़ती संख्या पर नियंत्रण रखने की जिम्मेदारी है। खानापूर्ति के लिए डॉग कैच स्क्वाड है ।इसमें कितने लोग कार्यरत है ये नगर निगम पूर्व महापौर और सभापति प्रमोद दुबे जानते होंगे। ये स्क्वाड क्या कार्य करता है, कितना कार्य करता है ये भी प्रमोद दुबे जानते होंगे। नागरिकों को पता है कि 70वार्ड में इस स्क्वाड को मादा कुत्तों को पकड़ कर नसबंदी करवा कर पुराने जगह पर वापस छोड़ देना है। इसका मतलब ये है कि कुत्तों की संख्या कम होने से रही। प्रमोद दुबे के बेटे को जिस कुत्ते ने आवारा कुत्ते किसी के सगे नहीं होते, सौतेले जरूर होते है।

ब्रह्माणपारा के उस अज्ञात कुत्ते को दाद देनी पड़ेगी जिसने पूर्व महापौर और सभापति प्रमोद दुबे के बेटे को काटने के लिए चिन्हित कर लिया, काट भी दिया और रफूचक्कर भी हो गया। बाद में उसे आभास हुआ होगा कि गलती हो गई है। जिस नगरीय निकाय को कुत्ते पकड़ने का जिम्मा सर्वोच्च न्यायालय ने दिया है उसी निकाय के पूर्व महापौर और सभापति के बेटे को काट लिया। डॉग कैच स्क्वाड ने कल बहुत खोज खबर की लेकिन कुत्ता शातिर निकला।वार्ड बदल दिया है। नगर निगम रायपुर में भाजपा पार्षदों का लगभग एकाधिकार है। कुत्ता थोड़ा भी समझदार होगा तो कांग्रेस पार्षदों के वार्ड में फिलहाल ठौर नहीं बनाएगा। डॉग कैच स्क्वाड को आज भी उस कुत्ते को खोजना है जिसने कल प्रमोद दुबे के बेटे को काटने की गुस्ताखी की है।

ये तो तय है कि कुत्ता आवारा था क्योंकि खुले क्षेत्र में था। एंटी रेबीज इंजेक्शन लगने का प्रश्न ही नहीं उठता। भूत पूर्व महापौर और सभापति प्रमोद दुबे के बेटे को भले ही नगरीय निकाय क्षेत्र के कुत्ते ने काटा है लेकिन एंटी रेबीज इंजेक्शन के लिए सरकारी अस्पताल की खोज प्रमोद दुबे ने नहीं की होगी।उनको अपने महापौर और सभापति कार्यकाल में सरकारी अस्पताल की स्थिति की जानकारी है। इस कारण निजी अस्पताल में सबसे अच्छी मेडिकल कंपनी के एंटी रेबीज इंजेक्शन का पता लगाकर बेटे को लगवाया होगा।

जमाना बदल गया है।कुत्ते के काटने पर अब पहले की तरह 14 इंजेक्शन नहीं लगते, बल्कि आधुनिक चिकित्सा के अनुसार 4 से 5 एंटी-रेबीज वैक्सीन (ARV) इंजेक्शन लगते हैं, जो आमतौर पर 14 दिनों के अंदर दिए जाते हैं, और कुछ गंभीर मामलों में रेबीज इम्यूनोग्लोबुलिन (RIG) का एक इंजेक्शन भी घाव के पास लगाया जाता है, कुल मिलाकर यह 2 से 3 तरह के इंजेक्शन हो सकते हैं (RIG + ARV),0, 3, 7, और 14/28 दिनों पर लगते हैं। ये इलाज खर्चीला और समय लेने वाला है।

बहरहाल, आज के समाचार पत्रों में पूर्व महापौर और सभापति प्रमोद दुबे के बेटे को कुत्ते के द्वारा काटे जाने की खबर है, जो भारतीय जनता पार्टी की ट्रिपल इंजिन सरकार को बताती है कि कुत्ते कितने खतरनाक लाइलाज खतरा बनते जा रहे है। सर्वोच्च न्यायालय के आदेश को मुख्य सचिव सहित सरकारी अमला समझ सकता है।आम नागरिक समस्या निदान के लिए प्रशासन से उम्मीद कर सकता है।कुत्ता पढ़ा लिखा नहीं है, उसे काटना है। जनप्रतिनिधि सजग रहे, उनके परिवार के किसी सदस्य को कुत्ता न काटे वरना इनके भीतर का धर्मेंद्र जाग कर कह सकता है बसंती इन कुत्तों के सामने मत नाचना, sorry, कुत्ते मै तेरा खून पी जाऊंगा

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