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Chhattisgarh का अनोखा गणेश पंडाल, जहां छत्तीसगढ़ी पकवानों का बांटा जा रहा प्रसाद, किसान रूप में विराजे हैं बप्पा

Janjgir: लोगों में गणेश चतुर्थी को लेकर खासा उत्साह है और भगवान विघ्नहर्ता को अलग-अलग अंजाम में सजाया गया है. ऐसे ही छत्तीसगढ़ी परंपरा को संजोने के लिए किसान रूप में गणपति बप्पा को विराजमान किया गया है और पंडाल भी अनोखा बनाया गया है.

जांजगीर में अनोखा गणेश पंडाल
अब तक आपने अलग-अलग अंदाज में विघ्नहर्ता को देखा होगा, लेकिन युवाओं ने कुछ अलग कर दिखाया है. जी है. जांजगीर के चांपा क्षेत्र के कोसमंदा गांव के ठाकुरदेव चौक में छत्तीसगढ़ी अंदाज में भगवान विघ्नहर्ता विराजमान है. यहां कुटिया के रूप में घास से अनोखा पंडाल बनाया गया है और सुपा, छिटिया सहित अन्य चीजों से भव्य सजावट की गई है. साथ ही, अलग-अलग तरह से लाइटें लगाई गई है, जो लोगों को खूब पसंद आ रहा है और तारीफ करें बिना लोग नहीं रह पा रहे हैं. सबसे विशेष बात यह भी है कि भगवान विघ्नहर्ता किसान रूप में विराजमान हैं और हाथों में हल, हसिया, गैंती पकड़े हुए हैं, वहीं रिद्धि-सिद्धि को छत्तीसगढ़ी अंदाज में सजाया गया है और लुगरा सहित अन्य वेश भूषा से सुशोभित है. जो लोगों के लिए आकर्षक का केंद्र बना हुआ है.

जहां छत्तीसगढ़ी पकवानों का बांटा जा रहा प्रसाद
खास बात यह भी है कि छत्तीसगढ़ की पहचान और छत्तीसगढ़ी पकवान, जैसे मिठ्ठा भजिया, ठेठरी, खुर्मी, फरा, चिलारोटी, मुठिया रोटी, आइरसा रोटी, कटवा रोटी, मालपुआ को प्रसाद के रूप में वितरण किया जाता है और यह लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है. लोग प्रत्येक दिन बन रहे छत्तीसगढ़ी पकवान का इंतजार करते हैं और फिर प्रसाद का आनंद उठाते हैं. साथ ही, प्रत्येक दिन यहां डांस और खेल प्रतियोगता का आयोजन किया जा रहा है. इस तरह छत्तीसगढ़ी पकवान, गणेश पंडाल और विघ्नहर्ता जी आकर्षण का केंद्र बना हुआ है. उन्होंने बताया कि इस पंडाल को बनाने के लिए उन्हें 1 सप्ताह का वक्त लगा है और आस-पास से घास लाया गया है, फिर पंडाल का निर्माण किया गया है.

संस्कृति को बचाने के लिए पहल
समिति के सदस्यों ने बताया कि छत्तीसगढ़ी व्यंजन धीरे-धीरे विलुप्त हो रहे हैं, आज के पीढ़ी के बच्चों को नाम भी पता नहीं होता, ऐसे में संस्कृति को आगे बढ़ाने के बारे में सोचा और कुछ अलग करने का ठाना. फिर घास से पंडाल बनाकर, भगवान विघ्नहर्ता को किसान स्वरूप में विराजमान किया गया है. समिति के सदस्यों ने कहा कि इस तरह का पंडाल क्षेत्र या जिले में नहीं है. वहीं, छत्तीसगढ़ी संस्कृति को लेकर बनाए गए इस पंडाल की तारीफ सभी वर्ग के लोग कर रहे हैं. छत्तीसगढ़ी को संजोए रखने के लिए समिति का प्रयास सराहनी है और पूरे जिले में इस बात की चर्चा भी हो रही है. समिति के जुनू ने गांव को भी अलग पहचान दिला दी है.

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