MP News: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव का असर अब मध्य प्रदेश की फार्मा इंडस्ट्री पर साफ दिखाई देने लगा है. चीन से आने वाले एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रेडिएंट्स (API) की सप्लाई बाधित होने और गैस की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण प्रदेश की दवा निर्माण इकाइयों पर शटडाउन का खतरा मंडरा रहा है. हालात यह हैं कि रॉ मटेरियल के दाम 30 से 50 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं, इसके बावजूद पर्याप्त सप्लाई नहीं मिल पा रही है, जिससे उत्पादन प्रभावित हो रहा है.
दवाओं का उत्पादन घटा और कीमतें बढ़ी
प्रदेश की करीब 300 फार्मा यूनिट्स में पहले जहां तीन शिफ्ट में काम होता था, अब वहां सिर्फ एक शिफ्ट में ही दवाएं बन रही हैं. इसका सीधा असर बाजार में दिख रहा है, जहां पैरासिटामोल, एजिथ्रोमाइसिन, शुगर और बीपी जैसी रोजमर्रा की दवाओं के दाम बढ़ गए हैं. उदाहरण के तौर पर, पैरासिटामोल की 100 गोलियां जो पहले 26-28 रुपए में मिलती थीं, अब 45-46 रुपए तक पहुंच गई हैं. इसी तरह एजिथ्रोमाइसिन की एक गोली 7 रुपए से बढ़कर करीब 9-9.5 रुपए हो गई है. मेटफॉर्मिन और एमलोडिपिन जैसी दवाओं के दामों में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है.
लागत बढ़ने से कीमत में उछाल
इंडियन ड्रग्स मैन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन (IDMP) मप्र के सचिव डॉ. अनिल सबरवाल के मुताबिक, रॉ मटेरियल की लागत बढ़ने के कारण दवा उत्पादन महंगा हो गया है, लेकिन सरकार की डीपीसीओ नीति के तहत कंपनियां तय सीमा से अधिक कीमत नहीं बढ़ा सकतीं. ऐसे में उत्पादन लागत और बिक्री मूल्य के बीच संतुलन बनाना मुश्किल हो रहा है. हालांकि सरकार ने पहले ही 20-25 प्रतिशत तक मूल्य वृद्धि की अनुमति दी है, लेकिन मौजूदा हालात में यह भी पर्याप्त नहीं है.
पेट्रोकेमिकल उत्पादों की कमी से संकट
फार्मा सेक्टर को एक और बड़ी चुनौती पेट्रोकेमिकल उत्पादों की कमी के रूप में सामने आ रही है. दवाओं के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले प्रोपलीन ग्लाइकोल, एसीटोन, एमडीसी और अन्य सॉल्वेंट्स की कीमतों में भी तेजी आई है और इनकी उपलब्धता प्रभावित हुई है. ये सभी तत्व दवाओं की प्रोसेसिंग और शुद्धिकरण के लिए जरूरी होते हैं, जिनकी कमी से उत्पादन प्रभावित होना तय है.
चीन से सप्लाई लगभग ठप
चीन से आने वाले डाइक्लोफेनाक, एजिथ्रोमाइसिन, पेनिसिलिन और अन्य जरूरी केमिकल्स की सप्लाई लगभग ठप हो चुकी है. पीथमपुर के उद्योग प्रतिनिधियों के अनुसार, सप्लाई चेन टूटने से दवा निर्माण में गंभीर बाधाएं आ रही हैं और कई यूनिट्स को उत्पादन सीमित करना पड़ रहा है.
इंजेक्शन बनाने वाली कंपनियां भी प्रभावित
इसके अलावा इंजेक्शन बनाने वाली कंपनियां भी मुश्किल में हैं, क्योंकि एलपीजी गैस की अनियमित सप्लाई के कारण एम्पुल (कांच की शीशी) की लॉकिंग प्रक्रिया प्रभावित हो रही है. इस प्रक्रिया में तेज तापमान की जरूरत होती है, जो पीएनजी गैस से संभव नहीं है. नतीजतन इंजेक्शन बनाने वाली इकाइयों में भी उत्पादन घटकर एक शिफ्ट तक सीमित हो गया है.
आगे और बढ़ सकती है परेशानी
कुल मिलाकर, अगर जल्द ही सप्लाई चेन और कच्चे माल की उपलब्धता सामान्य नहीं हुई, तो आने वाले समय में दवाओं की कीमतों में और बढ़ोतरी के साथ-साथ बाजार में उनकी कमी भी देखने को मिल सकती है.
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