Vande Mataram Controversy: पश्चिम बंगाल में अब भारतीय जनता पार्टी की सरकार है, जिसके मुखिया सुवेंदु अधिकारी हैं. वे लगातार ऐसे फैसले ले रहे हैं जो पिछली सरकार में केंद्र के साथ विवाद का कारण बन रहे थे. इन सब के बीच अब बंगाल में वंदे मातरम को लेकर भी सियासत तेज हो चली है. बीजेपी नेता और बंगाल सरकार में मंत्री अग्निमित्रा पाल ने जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष अरशद मदनी के बयान पर पलटवार किया है.
अग्निमित्रा पाल ने साफ कहा कि जो लोग भारत माता को मां मानने में हिचकते हैं, उन्हें इस देश में रहने का अधिकार नहीं होना चाहिए. वंदे मातरम को लेकर देशभर में इस तरह के बयान सामने आते ही रहते हैं.
क्या है पूरा विवाद?
दरअसल पूरा विवाद वंदे मातरम् को लेकर शुरू हुआ था. जमीयत उलेमा-ए-हिंद की ओर से इसे विवादित गीत बताते हुए अनिवार्य किए जाने का विरोध किया गया था. संगठन ने कहा था कि अगर इसे जबरन लागू किया गया तो वे अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे. इसी बयान के बाद राजनीतिक माहौल गर्मा गया.
अग्निमित्रा पाल ने क्या कहा?
आसनसोल में मीडिया से बातचीत के दौरान अग्निमित्रा पाल ने कहा कि भारत सिर्फ जमीन का टुकड़ा नहीं बल्कि मां के समान है. उन्होंने कहा कि जिस मिट्टी ने लोगों को पाला-पोसा, उसका सम्मान करना हर नागरिक का कर्तव्य है. बीजेपी नेता ने यह भी कहा कि देश में रहने वाले हर व्यक्ति को भारतीय कानून और संविधान का पालन करना होगा, चाहे वह किसी भी धर्म या समुदाय से जुड़ा हो.
अग्निमित्रा पॉल ने धार्मिक ध्रुवीकरण के आरोपों को भी खारिज किया. उन्होंने कहा कि बीजेपी किसी धर्म विशेष को निशाना नहीं बना रही, बल्कि कानून सबके लिए बराबर है. उनके मुताबिक अगर कोई भारत में रहना चाहता है तो उसे देश के नियमों और राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान करना होगा.
मदनी ने वंदे मातरम् को लेकर जताई थी आपत्ति
अरशद मदनी ने हाल ही में जमीयत उलेमा-ए-हिंद की बैठक में बीजेपी शासित राज्यों पर मुसलमानों को निशाना बनाने और धार्मिक मुद्दों के जरिए राजनीति करने का आरोप लगाया था.उन्होंने समान नागरिक संहिता और वंदे मातरम् को लेकर भी आपत्ति जताई थी.इसके बाद बीजेपी नेताओं ने उनके बयान को राष्ट्रविरोधी सोच से जोड़कर हमला तेज कर दिया.
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