नवा बैला के नवा सिंग, बैला चले टिंग टिंग

नवा बैला के नवा सिंग, बैला चले टिंग टिंग] एक लोकप्रिय छत्तीसगढ़ी कहावत है । यह प्रदेश के शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव पर फिट बैठता है। विभाग का कार्य भार संभालते ही उन्होंने कई प्रयोग करने का मन बनाया। यहां तक गुजरात राज्य का दौरा कर वहां के तकनीकी औश्र अन्य विषयों के गुर सीख कर आ गए। अब वे शिक्षा विभाग को सुधारने का दावा कर रहे हैं। उनके पहले भी कई लोगों ने नए राज्य में कई प्रकार के प्रयोग किए। उसका परिणाम कैसा रहा शायद अफसरों को मालूम होगा।

रमन सरकार के समय स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति सुनिश्चित करने थंब इंप्रेशन मशीन का प्रयोग किया गया। स्कूलों में 5 हजार के मशीनों को 20 हजार में खरीदा गया। कुछ दिनों में वह डब्बा हो गया। आज उसके अवशेष तक स्कूलोंमें देखने को नहीं मिल रहे हैं। अब नए मंत्री मोबाइल एप के जरिए शिक्षकों को अपनी उपस्थिति दर्ज कराने का नया मंत्र दे रहे हैं। उनकों नहीं मालूम होगा कि कोई भी शिक्षक अपने क्षेत्र में नहीं रहता अप डाउन कर पहुंचता है। ऐसे में मोबाइल एप से उनकी पहुंच कैसे साबित होगा।

शिक्षक पात्रता परीक्षा पास करने का नया शिगुफा दिया है। यह नियुक्ति और प्रमोशन दोनों के लिए जरूरी होगा। हालांकि अधिकारियों ने कोर्ट के आदेश पर यह बात मंत्री से कहलवा दी है, लेकिन इसमें कुछ व्यावहारिक दिक्कतें हैं। पहले भी यह परीक्षा शिक्षक बनने के लिए अनिवार्य किया गया था। साल में दो बार परीक्षा होती थी, बाद में इसका पता ही नहीं चला। बीएड, डीएड और अन्य शिक्षक प्रशिक्षण के बाद टेट को लाने का फार्मूला कितना प्रभावी होगा यह समझ के परे हैं। वैसे भी राज्य में शिक्षकों को समय पर प्रमोशन नहीं मिलता। आज भी प्रदेश के स्कूल और कॉलेजों में शिक्षक केवल याचक रह गए हैं।

युक्तियुक्तकरण का शिक्षकों ने विरोध किया उसके बाद भी किया गया। ढेरों गलतियों के बाद भी डीईओ आज भी मजे में है। सिनियर को दुसरी जगह भेज दिया और जूनियर जुगाड़ कर वहीं बैठा है। मंत्रर जी जरा युक्तियुक्त करण की सिरे से जांच कराएंगे तो पाएंगे कि आधे से ज्यादा लोगों को प्रताडित करने डीईओ ने खेला किया। कोरबा के एक शिक्षक को युक्तियुक्तकरण के नाम पर सुकमा भेज दिया गया। सरकार ने तीन कमेटी बना दी। अफसर उसमें सदस्य हैं वो भला क्यों अपनी गलती मानेंगे। ऐसे में तीनों समितियों के सामने अभ्यावेदन देने के बाद भी लोगों को कोई रास्ता नहीं मिल रहा। हिन्दी माध्यम में पढाने वाले को अंग्रेजी माध्यम में भेज दिया गया। समिति ने माना यह गलत है फिर भी अब तक उसे कहीं और पदस्थ नहीं किया गया।

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