दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने हाल ही में पति की विदेश में अर्जित आय को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि अंतरिम मेंटेनेंस की रकम तय करना सिर्फ गणित का सवाल नहीं है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि पति विदेश में कमाता है, तो उसकी विदेशी कमाई को भारतीय रुपये में बदलकर उसी आधार पर पत्नी को मेंटेनेंस देना सही तरीका नहीं माना जा सकता। न्यायालय ने यह भी संकेत दिया कि मेंटेनेंस तय करते समय पति की कुल वित्तीय स्थिति, जीवनशैली, खर्च और पत्नी की जरूरतों को समग्र रूप से देखा जाना चाहिए।
यह टिप्पणी जस्टिस अमित महाजन ने उस मामले में की, जिसमें एक महिला और उसके पति दोनों ने फैमिली कोर्ट के मई 2023 के आदेश को चुनौती दी थी। फैमिली कोर्ट ने महिला को 50 हजार रुपये प्रति माह अंतरिम मेंटेनेंस देने का आदेश दिया था। पत्नी इस रकम को बढ़ाने की मांग कर रही थी, जबकि पति इस आदेश का विरोध कर रहा था।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने क्या कहा?
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि अंतरिम मेंटेनेंस तय करते समय कोर्ट को सीमित दायरे में रहना होता है। इस स्तर पर न तो विस्तृत जांच की जा सकती है और न ही अंतिम निष्कर्ष निकाला जा सकता है। कोर्ट ने बताया कि कई मामलों में, खासकर जब पति विदेश में काम करता है और अपनी आय की पूरी जानकारी नहीं देता, तो कोर्ट को उपलब्ध तथ्यों, जीवनशैली और परिस्थितियों के आधार पर अनुमान लगाना पड़ता है।
कोर्ट ने इस मामले में स्वीकार किया कि पति अमेरिका में अमेजन डॉट कॉम सर्विसेज एलएलसी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के तौर पर काम कर रहा है और वहीं रह रहा है, जबकि पत्नी बेरोजगार है। जस्टिस अमित महाजन ने स्पष्ट किया कि अंतरिम मेंटेनेंस तय करते समय सिर्फ विदेशी कमाई को भारतीय रुपये में बदलकर उसका आधार लेना उचित नहीं है, बल्कि पति की आय, जीवनशैली और पत्नी की जरूरतों को समग्र रूप से देखा जाना चाहिए।
पत्नी का दावा करोड़ों रुपये कमाता है पति
कोर्ट ने इस मामले में स्वीकार किया कि पति अमेरिका में अमेजन डॉट कॉम सर्विसेज एलएलसी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के तौर पर काम कर रहा है और वहीं रह रहा है, जबकि पत्नी बेरोजगार है। पत्नी ने दावा किया था कि पति की सालाना कमाई करीब 1.76 करोड़ रुपये है और उसने डॉलर में आय का हलफनामा भी दाखिल किया था।
हालांकि हाईकोर्ट ने कहा कि अमेरिका में रहने वाले व्यक्ति के खर्च भी डॉलर में होते हैं, और वहां का जीवन स्तर और खर्च दिल्ली से काफी अलग है। इसलिए सिर्फ विदेशी आय को भारतीय रुपये में बदलकर अंतरिम मेंटेनेंस तय करना सही तरीका नहीं माना जा सकता। जस्टिस अमित महाजन ने स्पष्ट किया कि मेंटेनेंस तय करते समय पति की आय, जीवनशैली और पत्नी की जरूरतों को समग्र रूप से देखा जाना चाहिए। इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट ने अंतरिम मेंटेनेंस की रकम 50 हजार रुपये से बढ़ाकर 1 लाख रुपये प्रति माह कर दी। कोर्ट ने कहा कि यह राशि संतुलित, व्यावहारिक और परिस्थितियों के आधार पर तय की गई है।
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