सीजीएससी में दवा घोटाले के बाद अब जैम पोर्टल के माध्यम से दवा खरीदी का फरमान जारी किया। सरकार के फरमान से साफ हो गया है कि अब कमीशन का खेल खत्म करने की तैयारी है। सीजीएमएससी अध्यक्ष दीपक महस्के के समक्ष यह तथ्य आया कि जैम पोर्टल में मिलने वाली दवाईयां महंगी है। तथ्यों के बीच उन्होंने यह तर्क दिया कि अफसरों से चर्चा के बाद ही कुछ कहेंगे। यानि अब महस्के सरकार की रणनीति से मसके गए। पाेर्टल के जरिए होने वाली खरीदी से यहां होने वाली सेटिंग का बड़ा हिस्सा उपर से ही बंट जाएगा।
मोक्षित कॉर्पोरेशन ने छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन के अधिकारियों के साथ मिलीभगत कर अवैध रूप से मेडिकल उपकरण और रिएजेंट की आपूर्ति का ठेका हासिल किया। इसके अलावा, कुछ अन्य फर्में भी हैं जिन्हें गुणवत्ता मानकों का पालन न करने के कारण ब्लैकलिस्ट किया गया है या जांच के दायरे में हैं। मान फार्मास्यूटिकल्स लिमिटेड , रिकॉर्डर्स एंड मेडिकेयर सिस्टम्स जैसी कंपनियां शामिल हैं। मोक्षित तो मुर्क्षित हो गया है। सूत्र बताते हैं कि इसमें एक भाजपा नेता का पैसा लगा है। अब सरकार आने पर उम्मीद बनी थी की रूका हुआ अरबों का बिल निकल जाएगा। महस्के को इसी उम्मीद में बिठाया गया, पर श्याम जी अपना हिस्सा कैसे जाने देते।
ऐसा भी हुआ खेल
जेम पोर्टल में स्टील के एक जग की खरीद पर हाल ही में विवाद खड़ा हुआ था, जिसमें छत्तीसगढ़ के आदिवासी विकास विभाग पर 32,000 रुपये प्रति जग की दर से 160 जग खरीदने का आरोप लगा था, जिसकी कुल कीमत 51 लाख रुपये थी अब दवा की कीमत कैसी होगी यह अब ऑनलाइन तय होगा। यहां पर पारदर्शी व्यवस्था के नाम पर खेल होने से पता ही नहीं लगेगा। सरकार को यह पहल करनी चाहिए कि अस्पताल अपनी दवाएं सीधे पोर्टल से आर्डर कर दे।
50 प्रतिशत मार्जिन
कहा जाता है कि दवाओं का एमआरपी कुल लागत से 50 प्रतिशत ज्यादा होती है। थोक व्यापारी 40 प्रतिशत तक डिस्काउंट में देते हैं। चिल्हर में बेचने वाला एमआरपी पर ही पूरा वसूली कर लेता है। ऐसे में सरकारी खरीदी इस कारनामें से कैसे बच सकता है।
नया खेला
पिछली सरकार के दौरान अफसरों ने सीणे दवा कंपनी पकड़कर लाभ लिया। सीजीएमएससही अध्यक्ष भी ऐसे ही रास्ते पर चल पड़े थे, लेकिन सरकार ने नया फरमान जारी की उनका अभियान रोक लिया। सह न रूके इसे लेकर खेला कर दिया गया।
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