आम आदमी पार्टी(AAP) ने भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए अपने 7 राज्यसभा सांसदों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। पार्टी आज राज्यसभा सचिवालय में इन सांसदों की सदस्यता रद्द करने के लिए याचिका दायर करने जा रही है।
इन बागी सांसदों में राघव चड्ढा, संदीप पाठक, अशोक मित्तल, हरभजन सिंह, राजिंदर गुप्ता, स्वाति मालीवाल और विक्रमजीत साहनी शामिल हैं, जिन्होंने हाल ही में बीजेपी का दामन थामा है।
AAP का तर्क—सांसद नहीं कर सकते ‘विलय’
AAP का साफ कहना है कि सांसद व्यक्तिगत रूप से पार्टी का विलय नहीं कर सकते, इसलिए यह मामला सीधे तौर पर दलबदल की श्रेणी में आता है। पार्टी संविधान की 10वीं अनुसूची के तहत इनकी अयोग्यता की मांग कर रही है।
कोर्ट जाने की भी तैयारी
AAP ने संकेत दिए हैं कि यदि राज्यसभा स्तर पर संतोषजनक कार्रवाई नहीं होती, तो वह अदालत का दरवाजा भी खटखटाएगी। इसके लिए पार्टी कानूनी विशेषज्ञों से सलाह ले रही है।
राज्यसभा में AAP की ताकत घटी
इन 7 सांसदों के जाने के बाद अब राज्यसभा में AAP के पास सिर्फ 3 सदस्य ही बचे हैं, जिससे पार्टी की संसदीय ताकत पर बड़ा असर पड़ा है।
केजरीवाल का तीखा बयान
AAP प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि “बीजेपी ने एक बार फिर पंजाबियों के साथ धोखा किया है।”
क्या कहते हैं राजनीतिक जानकार?
विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला कानूनी रूप से जटिल हो सकता है। पहले भी ऐसे मामलों में यदि दो-तिहाई सांसदों ने एक साथ दल बदला, तो उसे ‘विलय’ मानकर मान्यता दी गई है और सदस्यता बची रही है।
अब इस पूरे विवाद में अंतिम फैसला राज्यसभा के सभापति के पास होगा, जो तय करेंगे कि यह दलबदल है या वैध विलय।
INDIA WRITERS Voices of India, Words That Matter