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दिल्ली में रेनवाटर हार्वेस्टिंग पिट्स में मिला सीवर का गंदा पानी, DJB ने NGT को सौंपी रिपोर्ट

दिल्ली में बारिश का पानी जो घर की छतों से इकट्ठा होकर भूजल को रिचार्ज करने के लिए इस्तेमाल होता है, वही अब बड़े खतरे का सबब बनता जा रहा है। दिल्ली जल बोर्ड (DJB) ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) को एक रिपोर्ट सौंपी है, जिसमें हैरान करने वाले तथ्य सामने आए हैं। सितंबर 2025 में द्वारका के कोऑपरेटिव ग्रुप हाउसिंग सोसाइटीज (CGHS) के 144 रेनवाटर हार्वेस्टिंग पिट्स का सैंपल लिया गया।

रिपोर्ट के अनुसार, 124 पिट्स में फेकल कोलीफॉर्म (मल-जनित बैक्टीरिया) पाए गए। यानी ज्यादातर पिट्स में सीवर का गंदा पानी मिल रहा है, जिससे न सिर्फ पानी की सफाई प्रभावित हो रही है बल्कि स्वास्थ्य और भूजल की गुणवत्ता पर भी गंभीर खतरा बन गया है।

कहानी 2023 से शुरू हुई, अब खतरा और बढ़ गया
दिल्ली में बारिश का पानी जो घर की छतों से इकट्ठा होकर भूजल को रिचार्ज करने के लिए इस्तेमाल होता है, वही अब स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए खतरा बन गया है। दिल्ली जल बोर्ड (DJB) ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) को एक रिपोर्ट सौंपी है, जिसमें हैरान करने वाले तथ्य सामने आए हैं। सितंबर 2025 में द्वारका के कोऑपरेटिव ग्रुप हाउसिंग सोसाइटीज (CGHS) के 144 रेनवाटर हार्वेस्टिंग पिट्स का सैंपल लिया गया, तो 124 पिट्स में फेकल कोलीफॉर्म (मल-जनित बैक्टीरिया) पाया गया।

यह मामला फरवरी 2023 से NGT में चल रहा है, जब एक द्वारका निवासी ने शिकायत की थी कि सोसाइटियों के रेनवाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम गलत तरीके से बने हैं और इससे भूजल प्रदूषित हो रहा है। मई 2023 में NGT की एक्सपर्ट कमिटी ने DJB और DPCC के साथ मिलकर 235 सोसाइटियों की जांच की। इसमें 180 जगहों पर अमोनियाकल नाइट्रोजन और टीडीएस का स्तर बहुत ज्यादा पाया गया। बाद में, मार्च 2025 तक की रिपोर्ट में 115 सोसाइटियों में फेकल कोलीफॉर्म की पुष्टि हुई। DJB का कहना है कि यह स्थिति भूजल की गुणवत्ता और सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है और इसे सुधारने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

दिल्ली जल बोर्ड (DJB) ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) को रिपोर्ट सौंपी है। सितंबर 2025 में द्वारका के 144 रेनवाटर हार्वेस्टिंग पिट्स का सैंपल लिया गया। रिपोर्ट में कहा गया है कि 124 पिट्स दूषित पाए गए (फेकल कोलीफॉर्म की मौजूदगी), 8 पिट्स सूखे थे, 7 पिट्स में रिपेयर चल रहा था, 2 पिट्स पूरी तरह बंद थे, 3 सोसाइटियों ने सैंपल लेने से मना कर दिया यह मामला फरवरी 2023 से NGT में पेंडिंग है। तब से लेकर मार्च 2025 तक की जांच में भी सोसाइटियों के पिट्स में अमोनियाकल नाइट्रोजन, टीडीएस और फेकल कोलीफॉर्म का स्तर उच्च पाया गया था

क्यों खतरनाक हैं ये बैक्टीरिया ?
विशेष रूप से चिंता की बात यह है कि इन पिट्स में फेकल कोलीफॉर्म (मल-जनित बैक्टीरिया) पाया गया है। यह बैक्टीरिया सीवर के सीधे संपर्क से आते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, इससे भूजल प्रदूषित हो रहा है, जो आगे चलकर पीने के पानी को भी जहरीला बना सकता है और स्वास्थ्य पर बड़ा संकट ला सकता है।

दिल्ली जल बोर्ड (DJB) ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) को रिपोर्ट सौंपी है। सितंबर 2025 में द्वारका के 144 रेनवाटर हार्वेस्टिंग पिट्स का सैंपल लिया गया, जिसमें 124 पिट्स दूषित पाए गए, और उनमें फेकल कोलीफॉर्म (मल-जनित बैक्टीरिया) मौजूद था। DJB ने अब सख्त कदम उठाना शुरू कर दिया है। उन्होंने दिल्ली पॉल्यूशन कंट्रोल कमिटी (DPCC) से दोषी सोसाइटियों पर पर्यावरणीय मुआवजा लगाने की मांग की है। कई सोसाइटियों से पानी के बिल पर मिलने वाली 10% छूट वापस ली जा चुकी है, और कुछ सोसाइटियों का पानी कनेक्शन काटने की प्रक्रिया भी चल रही है। सभी सोसाइटियों को मौखिक और लिखित रूप से चेतावनी दी जा रही है कि वे अपने हार्वेस्टिंग सिस्टम को मानकों के अनुसार ठीक करें, नहीं तो उनके खिलाफ और सख्त कार्रवाई की जाएगी।

साथ ही, अगस्त 2025 में DJB ने नई गाइडलाइंस भी जारी की हैं रेनवाटर पिट्स स्टॉर्मवाटर ड्रेन के पास न बनाए जाएं। पहली बारिश को अलग बाईपास किया जाए ताकि गंदगी भूजल में न जाए। ग्राउंडवाटर लेवल की निगरानी के लिए पाइजोमीटर लगाने पर जोर दिया गया।

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