कौशाम्बी आत्महत्या कांड : SIT करेगी मामले की जांच, फर्जी POCSO केस की खुलेंगी परतें

कौशाम्बी। उत्तर प्रदेश के कौशाम्बी आत्महत्या कांड की जांच स्थानीय SIT को दे दी गई है। क्षेत्राधिकारी सिराथू की अगुवाई में एक विशेष जांच टीम पूरे मामले की जांच करेगी। जिसमें बेगुनाह युवक पर पास्को और बलात्कार जैसी गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज करके जेल भेजा गया था। बेकसूर युवक के पिता रामबाबू तिवारी की मौत हो गई थी। जिसमें हत्या का केस आरोपी प्रधान पर लगाया गया है। प्रधान को पुलिस ने जेल भेज दिया है। पास्को एक्ट का कोई एविडेंस नहीं मिला है।

पास्को एक्ट का कोई एविडेंस नहीं मिला
यह पूरा मामला जिले के सैनी कोतवाली क्षेत्र के एक गांव का है। जहां, सिद्धार्थ तिवारी उर्फ धन्नू पर आठ वर्षीय मासूम बच्ची के साथ बहला फुसलाकर आप्रकृतिक यौन कृत्य करने का आरोप लगाया गया था। मासूम बच्ची के पिता की तहरीर पर पुलिस ने सिद्धार्थ तिवारी के खिलाफ एक्शन लिया और पॉक्सो एक्ट सहित अन्य गंभीर धाराओं में मामला दर्ज करके उसे गिरफ्तार करके जेल भेज दिया गया था।

रामबाबू ने कहा था- मेरे बेटे को फंसाया
आरोपी के पिता रामबाबू तिवारी ने इस पूरे मामले को फर्जी बताया और कहा था कि जमीनी विवाद को लेकर ग्राम प्रधान भूप नारायण पाल ने उनके बेटे को फंसाने काम किया। रामबाबू ने प्रधान और उसके भाईयों के खिलाफ केस दर्ज करने की मांग की थी। उसने पुलिस पर कार्रवाई न करने का आरोप लगाया था। बुधवार 4 जून को वह जहरीला पदार्थ खाकर थाने पहुंचा और उसने अपने पेट में आत्महत्या करने का कारण लिखा था। उसके जेब से सुसाइट नोट भी मिला था।

थाने में ही रामबाबू तिवारी की हालत बिगड़ गई थी। उसे आनन फानन में अस्पताल भेजा गया था। जहां पर इलाज के दौरान ही उसकी मौत हो गई थी। इसी बीच पीड़िता का बयान आया। जिसमें उसने मां के दबाव में आरोप लगाने की बात कबूली। जिसके बाद कोर्ट ने आरोपी धन्नू तिवारी को रिहा करने का आदेश दिया। लेकिन उनके झूठे आरोप ने एक बेकसूर की जान ले ली।

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