राशन दुकान आबंटन और भ्रष्ट्राचार

बिलासपुर जिले के खाद्य विभाग के एक निरीक्षक के विरुद्ध एंटी करप्शन विभाग ने राशन दुकान आबंटन के नाम पर तथाकथित राशि लिए जाने की कार्यवाही की है। तथाकथित रूप से रिश्वत के रूप में राशि लिए जाने की खबर है। आरोप से अपराध सिद्ध होने की दीर्घ न्यायालयीन प्रक्रिया है, इस कारण व्यक्ति हो, विभाग हो, परिवार हो समाज हो या प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया हो उन्हें संयमित होने की आवश्यकता है।
कानून की नजर में जिस भी व्यक्ति पर आरोप लगता है उस पर लांछन लगा कर अपराधी के रूप में प्रचारित करना प्रसारित करना मानवीय और संवेदना के रूप में कमजोर पक्ष है।

हर विभाग के अपने कायदे कानून होते है। खाद्य विभाग में राशन दुकान देने की प्रक्रिया निर्धारित है। किसी भी जिले या अनुविभाग में यूं ही राशन दुकान नहीं दिया जाता है। एक भी वार्ड या ग्राम पंचायत में जन संपर्क विभाग द्वारा विज्ञापन प्रकाशित किया जाता है। ग्राम पंचायत के राशन दुकान प्राप्ति के आवेदन से लेकर आबंटन की प्रक्रिया में खाद्य विभाग की प्रक्रिया शून्य है। न तो विज्ञापन प्रकाशित न करना, न आवेदन लेना और न ही जिस संस्था को राशन दुकान दिया जाना है उससे कोई सरोकार है। न प्रतिवेदन देना है न ही होने वाले अनुबंध में हस्ताक्षर करना है। ये सारी प्रक्रिया अनुविभागीय अधिकारी राजस्व के द्वारा सम्पन्न कराई जाती है।

ऐसी स्थिति में खाद्य निरीक्षक से किसी आवेदक का मिलना या रिश्वत की बात करना उचित प्रतीत नहीं होता है। राशन दुकानों का आबंटन अनुविभागीय अधिकारी राजस्व की संपूर्ण जिम्मेदारी है।इसलिए इस बात की भी जांच होनी चाहिए कि रिश्वत की राशि की मांग और पूर्ति के बीच कही खाद्य निरीक्षक माध्यम तो नहीं था? यदि माध्यम था तो अकेले आरोपी कैसे बना दिया गया? सह आरोपी हो सकता है, मुख्य आरोपी तक तो जांच एजेंसी पहुंची ही नहीं है। उच्च अधिकारी, अपने स्वार्थ सिद्धि के लिए अधीनस्थ कर्मचारियों को साधन बनाते है और जब ऐसी परिस्थिति आती है, मौन साध लेते है।

मस्तूरी में राशन दुकान आबंटन के नाम पर रिश्वत लेने के लिए केवल खाद्य निरीक्षक के विरुद्ध कार्यवाही अन्याय है।जब राशन दुकान आबंटन में प्रारंभिक से लेकर अंतिम प्रक्रिया तक खाद्य निरीक्षक की भूमिका शून्य है तो उसे आरोपी बनाना उचित नहीं है। जांच एजेंसी को राशन दुकान आबंटन की प्रक्रिया की गहन जानकारी लेना चाहिए और ये भी जांच करना चाहिए कि इस संपूर्ण प्रक्रिया में अनुविभागीय अधिकारी राजस्व की भूमिका क्या है? यदि खाद्य निरीक्षक को मिडिल मेन बनाया गया है तो भी मुख्य व्यक्ति के विरुद्ध भी जांच होनी चाहिए कार्यवाही होना चाहिए

Check Also

CG News: नक्सलवाद के खात्मे को लेकर दंतेवाड़ा में हाई लेवल बैठक, DGP अरुण देव गौतम बोले – सरेंडर ही नक्सलियों का आखिरी विकल्प

CG News: नक्सलवाद के जड़ से खात्मे को लेकर छत्तीसगढ़ पुलिस ने अब रणनीति को …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *