Bhopal News: भोपाल में मेट्रो के ब्लू लाइन कॉरिडोर के निर्माण कार्य को सुचारु रूप से पूरा करने के लिए रत्नागिरी तिराहा से भदभदा चौराहा तक लगे 13 अहम ट्रैफिक सिग्नल और सीसीटीवी कैमरों को हटाने की तैयारी की गई है. मेट्रो के सिविल और इलेक्ट्रिकल काम में किसी तरह की रुकावट न आए, इसके लिए यह फैसला लिया गया है. यह परियोजना करीब तीन साल तक चलेगी, ऐसे में इतने लंबे समय तक इन व्यस्त मार्गों पर बिना सिग्नल के ट्रैफिक संचालन करना पड़ेगा.
भारी ट्रैफिक के बीच बढ़ेगी मुश्किल
इन इलाकों में पहले से ही वाहनों का दबाव काफी ज्यादा रहता है. ट्रैफिक एक्सपर्ट्स का मानना है कि कई चौराहों पर हर घंटे 2000 से ज्यादा वाहन गुजरते हैं, जिससे हालात और चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं. सीमित संख्या में उपलब्ध ट्रैफिक पुलिसकर्मियों के भरोसे व्यवस्था बनाए रखना आसान नहीं होगा, क्योंकि जहां अभी सिग्नल मौजूद हैं, वहां भी ट्रैफिक नियंत्रित करना मुश्किल साबित हो रहा है.
सिग्नल शिफ्ट करने की योजना
इसी बीच ट्रैफिक विभाग ने स्मार्ट सिटी कंपनी को पत्र लिखकर इन सिग्नल और कैमरों को हटाने और जरूरत के मुताबिक अन्य स्थानों पर लगाने का प्रस्ताव दिया है. योजना के तहत 13 में से 9 सिग्नलों को नए चिन्हित स्थानों पर शिफ्ट किया जाएगा, ताकि उनके रखरखाव पर होने वाला अतिरिक्त खर्च भी कम किया जा सके.
ब्लू लाइन कॉरिडोर की तैयारी
करीब 13 किलोमीटर लंबे इस मेट्रो रूट पर अब तक लगभग 550 जगहों पर मिट्टी की जांच (सॉयल टेस्टिंग) पूरी की जा चुकी है. जियोटेक्निकल रिपोर्ट के आधार पर मेट्रो के पिलर और नींव की योजना तय की जा रही है. यह पूरा प्रोजेक्ट बड़े बजट में तैयार किया जा रहा है.
व्यस्त चौराहों पर असर तय
रंगमहल, रोशनपुरा, पिपलानी, रत्नागिरी और प्रभात चौराहा जैसे इलाके पहले से ही भारी ट्रैफिक के लिए जाने जाते हैं. ऐसे में अगले तीन साल तक बिना सिग्नल के ट्रैफिक संचालन प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है.
इन स्थानों से हटेंगे सिग्नल
जिन चौराहों से सिग्नल हटाए जाने हैं, उनमें भदभदा, डिपो, जवाहर चौक, रंगमहल, रोशनपुरा, कुशाभाऊ ठाकरे हॉल, पुलिस कंट्रोल रूम तिराहा, पुराना एसपी ऑफिस, प्रभात चौराहा, आईटीआई, जेके रोड, पिपलानी तिराहा और रत्नागिरी तिराहा शामिल हैं.
इन स्थानों पर लगाए जा सकते हैं सिग्नल
माता मंदिर, पीएंडटी चौराहा, मैनिट, रोहित नगर, पीसीसी तिराहा, बजरिया तिराहा, संगम तिराहा, रातीबड़ थाना चौराहा और जेके हॉस्पिटल तिराहा जैसे स्थानों पर इन्हें दोबारा स्थापित करने की संभावना जताई गई है.
पहले भी सामने आ चुका है मामला
इससे पहले बीआरटीएस कॉरिडोर हटाने के दौरान भी कई सिग्नल और कैमरे हटाए गए थे, लेकिन उनका उपयोग नहीं होने के बावजूद एजेंसी को मेंटेनेंस का भुगतान करना पड़ा था, जिसे देखते हुए इस बार संसाधनों के बेहतर उपयोग पर जोर दिया जा रहा है.
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