Bengal Election Counting Observers: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान और बाद में भी जमकर हंगामा देखने को मिल रहा है. प्रदेश की मौजूदा सरकार लगातार चुनाव आयोग और बीजेपी पर कई गंभीर आरोप लगा रही है. इसी मामले में टीएमसी की तरफ से केंद्र सरकार और PSU कर्मचारियों को काउंटिंग सुपरवाइजर बनाने पर विरोध दर्ज कराया गया था. इसके खिलाफ पहले हाईकोर्ट और बाद में सुप्रीम कोर्ट का रुख अख्तियार किया था. हालांकि दोनों ही जगहों से टीएमसी को बड़ा झटका लगा है.
सुप्रीम कोर्ट में टीएमसी की तरफ से याचिका दायर की गई थी. इसमें तत्काल सुनवाई की मांग की गई थी. मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने णमूल कांग्रेस (TMC) की केंद्र सरकार और PSU कर्मचारियों को काउंटिंग सुपरवाइजर बनाने के फैसले से जुड़ी आपत्ति खारिज कर दी है.
जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की विशेष बेंच ने कहा- 13 अप्रैल 2026 का चुनाव आयोग की तरफ से जारी सर्कुलर ही लागू रहेगा. इस मामले में अलग से कोई आदेश जारी करने की जरूरत नहीं है. मतलब साफ है कोर्ट के आदेश के बाद टीएमसी को बड़ा झटका लगा है. ऐसे में देखना होगा कि अब टीएमसी क्या नया आगे क्या करती है.
सीएम ममता ने लगाए थे गंभीर आरोप
बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पहले चरण के मतदान के दौरान भी कई आरोप लगाए थे. उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा था कि केंद्रीय कर्मचारी और एजेंसियां बीजेपी के लिए काम कर रही हैं. यही वजह है कि उन्होंने केंद्रीय कर्मचारियों की नियुक्ति न करने की मांग की थी. याचिका में केवल केंद्र सरकार/पीएसयू कर्मचारियों को काउंटिंग सुपरवाइजर बनाने पर आपत्ति जताई गई थी. हालांकि कोर्ट ने उनकी मांग को खारिज कर दिया है.
कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट ने मामले पर सुनवाई करते हुए साफ तौर पर कहा कि इस मामले एक गलतफहमी है. यह मानना सही नहीं है कि राज्य सरकार और केंद्र सरकार के कर्मचारी अलग-अलग तरह के होते हैं. दोनों ही सरकारी कर्मचारी हैं और दोनों काम ही लगभग एक समान है. इसके साथ ही यह भी कहा कि किसी राजनीतिक दल को यह तय करने का अधिकार नहीं है कि काउंटिंग में किसे शामिल किया जाए.
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