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विष्णु के राज में नौकरशाह कर रहे नंगा नाच, ननकी ने खोली पोल, तो गायब कर दी उनकी सभी शिकायतें, साय फंसे मायाजाल में अब निकाल रहे रास्ता, पंडित और उनके भगत बने अनुचार

छत्तीसगढ़ में विष्णु के राज में लोगों को सुशासन देने का दावा किया जा रहा है। राजा सदविचार और जनता के प्रति वफादार हो यह जरूरी है। साथ ही यह भी जरूरी है कि राजा को अपने कारिदों के कामकाज को भी देखना चाहिए। उनके खिलाफ आने वाली शिकायतों को समय पर जांच कराना चाहिए। वस्तु स्थिति से स्वयं अवगत नहीं हो पाए, तो सार्वजनिक रूप से आए पत्र के बाद उन्हें पूछना चाहिए कि कौन सी शिकायतें आई जो मुझ तक नहीं पहुंची। ऐसा कुछ मुखिया के सामने हो रहा है। यहां पर पंडित दया के नंद, सहित उनके भगत भी हैं। जो नाक के नीचे ही ऐसे मामलों को गायब कर देते हैं। राजा को लगता है कि मेरे राज में सभी खुश हैं।

ऐसा ही इसके पहले वाले राज में भी था। वहां पर लेकिन इतना बडा मामला निकला कि सब अरब पति बन गए थे। यहां पर भी ऐसा ही खेल चल रहा है। ननकी बाबा ने पार्टी के हित में हाईकोर्ट जाकर पार्टी को इतना मुद्दा दिए, लेकिन उनके कहने पर एक कलेक्टर को नहीं हटा रहे। कहीं ऐसा तो नहीं यहां पर भी खदान और बाल्कों को लाभ पहुंचाने पंडित के संरक्षण में बंसल बडे सेवा में लगा हो। वैसे आपके नाम के नीचे बिजली मामले में अरबों का खेल उद्योगों को छूट देने के नाम पर किया गया। यह नए सहाब की बोहनी थी।

भाजपा के वरिष्ठ नेता ननकी राम कंवर ने कोरबा कलेक्टर पर कार्रवाई न होने पर सीधे मुख्यमंत्री सचिवालय के अधिकारियों पर आरोप मढ़ा हैं। उन्होंने साफ तौर पर कहा है कि मुख्यमंत्री के सचिव गलत जानकारी देकर उन्हें बचा रहे हैं। ननकी राम कंवर ने पूर्व में पीएम आवास योजना के मामले को लेकर मुख्यमंत्री के सचिव पी दयानंद के खिलाफ पीएमओ तक शिकायत की थी। उन्होंने कोरबा कलेक्टर को सीधे तौर पर बचाने का भी आरोप उन पर लगाया था।

ओडीएफ से लेकर डीएमएफॅ में गोलामाल
कंवर ने मामले में मालगांव व रलिया में करोडो रूपये का फर्जी मुवाबजा प्रकरण बनवाया गया, लेकिन दोषियों पर कोई कार्यवाही नहीं किया गया। डीएमएफ के करोडो रूपये को मुवाबजा वितरण के नाम पर विधि विरुद्ध खर्च कर दिया गया, बालको से साठ गाठ कर बालको को निजी लाभ दिलाने के लिए खनिज न्यास का करीब 29 करोड़ पैसा स्वीकृत कर दिया गया।

मामले में भी मुख्यमंत्री सचिवालय के अफसर घेरे में हैं। उनकी शिकायत पर कोई संज्ञान नहीं लिया लेकिन केंद्र सरकार ने मेरे शिकायत की जांच हेतु मुख्य सचिव छत्तीसगढ़ शासन, सचिव खनिज सहित संचालक खनिज विभाग को पत्र भेजा गया लेकिन एक भी नोटिस में कोई जाँच नहीं हुई। कलेक्टर अजित बसंत को छत्तिसगढ़ सरकार का संरक्षण मिल रहा है।

अब तक एक्शन नहीं
बताया गया है कि पिछले डेढ़ साल से श्री कंवर किसी न किसी मामले में शिकायत कर तथ्यों से अवगत कराते रहे हैं। उन्होंने कलेक्टर को बचाने वाले अफसरों की भी सीएम से सीधे शिकायत की, पर सीएम के द्वारा गंभीरता से नहीं लिया गया। उन्होंने खनिज सचिव पी दयानंद के सीधे तौर पर जूड़े होने के कई मामले पेश किए पर कोई एक्शन अब तक नहीं होने से अचंभित हैं।

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