अल फलाह यूनिवर्सिटी अध्यक्ष जवाद अहमद सिद्दीकी को अंतरिम जमानत मिली, साकेत कोर्ट ने 2 हफ्ते के लिए किया मंजूर

नई दिल्ली के साकेत कोर्ट ने अल फलाह यूनिवर्सिटी (Al Falah University) के अध्यक्ष जवाद अहमद सिद्दीकी(Jawad Ahmed Siddiqui) को मनी लांड्रिंग के आरोपों में 2 हफ्ते की अंतरिम जमानत दे दी है। कोर्ट ने जमानत देने के दौरान कहा कि जवाद की पत्नी की तबीयत गंभीर है और मामले में चार्जशीट पहले ही दाखिल हो चुकी है। कोर्ट ने यह जमानत सीमित अवधि के लिए दी है और अगले आदेश तक लागू रहेगी।

जमानत की मांग करते हुए जवाद ने अदालत को बताया कि उनकी पत्नी चौथे चरण के मेटास्टैटिक ओवेरियन कैंसर से पीड़ित हैं और नई दिल्ली के इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल में कीमोथेरेपी करा रही हैं। अदालत ने इस गंभीर स्वास्थ्य कारण को देखते हुए उन्हें सीमित अवधि की जमानत दी।

अंतरिम जमानत को चुनौती दे सकती है ED
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने संकेत दिया है कि वह अल फलाह यूनिवर्सिटी समूह के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी को दिल्ली की अदालत द्वारा दी गई दो हफ्ते की अंतरिम जमानत को चुनौती दे सकता है। अधिकारियों के अनुसार, मामले के कई अन्य पहलुओं की जांच अभी भी जारी है और ED का मानना है कि सिद्दीकी इस जमानत अवधि के दौरान जांच को प्रभावित कर सकते हैं। सिद्दीकी, जिनकी उम्र 61 वर्ष है, को शनिवार को धन शोधन के मामले में अदालत ने जमानत दी थी। ED ने इस जमानत पर आपत्ति जताई है।

जवाद अहमद सिद्दीकी पर अवैध धन जुटाने के आरोप
अल फलाह यूनिवर्सिटी समूह के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी पर आरोप है कि उन्होंने फरीदाबाद स्थित शिक्षण संस्थान के छात्रों से ली गई फीस के जरिए अवैध धन जुटाया और कॉलेजों की मान्यता व प्रमाणन के बारे में गलत जानकारी दी। ईडी ने सिद्दीकी को नवंबर 2025 में गिरफ्तार किया था और फिलहाल वह न्यायिक हिरासत में हैं। सिद्दीकी ने अपनी पत्नी की देखभाल के लिए अंतरिम जमानत की अर्जी दाखिल की थी। उनकी पत्नी कैंसर से पीड़ित हैं और 12 मार्च को कीमोथेरेपी निर्धारित है। ईडी के अधिकारियों ने बताया कि एजेंसी जल्द ही दिल्ली उच्च न्यायालय में स्थानीय अदालत के आदेश को चुनौती देगी।

लाल किला ब्लास्ट मामले में दर्ज है केस
अधिकारियों के अनुसार, स्थानीय अदालत ने जवाद अहमद सिद्दीकी को अंतरिम जमानत देते समय ED की दलीलों पर गंभीरता से विचार नहीं किया। ईडी ने बताया कि सिद्दीकी के खिलाफ पिछले साल 10 नवंबर को लाल किला के सामने हुए विस्फोट से जुड़ी गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (UAPA) के तहत भी एक प्राथमिकी दर्ज है। एजेंसी का मानना है कि इन मामलों के चलते जमानत का फैसला जांच को प्रभावित कर सकता है, और इसलिए वह उच्च न्यायालय में आदेश को चुनौती देगी।

प्रवर्तन निदेशालय (ED) उच्च न्यायालय को सूचित कर सकती है कि अल फलाह मेडिकल कॉलेज में नियुक्तियों के दौरान कई अनियमितताएं हुईं। आरोपपत्र के अनुसार, राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (NIA) द्वारा गिरफ्तार दो चिकित्सकों सहित लाल किला क्षेत्र विस्फोट के कथित आत्मघाती हमलावर और अन्य विशेषज्ञों को बिना किसी पुलिस सत्यापन या जांच के ही कॉलेज में नियुक्त किया गया।

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