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सबरीमाला सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी-‘व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी’ की जानकारी मान्य नहीं

सबरीमाला मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट में अहम बहस हुई। इस दौरान जस्टिस बीवी नागरत्ना ने साफ कहा कि ‘व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी’ से मिली जानकारी को अदालत में स्वीकार नहीं किया जा सकता।

यह टिप्पणी तब आई जब वरिष्ठ वकील नीरज किशन कौल ने कहा कि ज्ञान किसी भी स्रोत से आए, उसे स्वीकार करना चाहिए। उन्होंने शशि थरूर के एक लेख का हवाला भी दिया।

इस पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि किसी भी लेखक की राय सिर्फ व्यक्तिगत होती है और उसका अदालत पर कोई बाध्यकारी असर नहीं होता।

धार्मिक अधिकार बनाम सामाजिक सुधार पर बहस
सुनवाई के दौरान संविधान के अनुच्छेद 25(2)(ख) और 26(ख) को लेकर भी चर्चा हुई। कोर्ट ने कहा कि धार्मिक संप्रदायों के अधिकार पूरी तरह सर्वोपरि नहीं होते, बल्कि वे सार्वजनिक व्यवस्था, नैतिकता और स्वास्थ्य के अधीन होते हैं।

वकील कौल ने तर्क दिया कि धार्मिक अधिकारों और सामाजिक सुधार कानूनों के बीच संतुलन होना चाहिए। इस पर जस्टिस नागरत्ना ने भी सहमति जताई कि सामाजिक सुधार के लिए बनाए गए कानून जरूरी हैं।

कुल मिलाकर, कोर्ट ने साफ संकेत दिया कि बिना प्रमाण के स्रोत (जैसे व्हाट्सएप फॉरवर्ड) अदालत में मान्य नहीं होंगे और धार्मिक अधिकारों के साथ सामाजिक सुधार भी उतना ही जरूरी है।

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