आई-पैक कार्यालय और उसके प्रमुख के आवास पर हुई प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान तीखी बहस देखने को मिली। प्रवर्तन निदेशालय की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल ने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल सरकार और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने जांच में हस्तक्षेप किया और महत्वपूर्ण फाइलें हटाईं। इस पर राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने ईडी की कार्रवाई के समय और मंशा पर सवाल खड़े किए।
सुनवाई के दौरान ईडी ने अदालत को बताया कि आई-पैक कार्यालय में तलाशी के दौरान राज्य प्रशासन की भूमिका एक चौंकाने वाला पैटर्न दर्शाती है। एजेंसी का आरोप है कि जांच के समय मुख्यमंत्री स्वयं मौके पर पहुंचीं, जिससे जांच में बाधा उत्पन्न हुई। ईडी ने इसे गंभीर मामला बताते हुए केंद्रीय जांच एजेंसी से जांच कराने की मांग की।
सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि जब वैधानिक एजेंसियां अपने अधिकारों के तहत कार्रवाई कर रही थीं, तब राजनीतिक हस्तक्षेप किया गया। उन्होंने दावा किया कि अधिकारियों के फोन और दस्तावेज जब्त कर लिए गए, जिससे जांच प्रभावित हुई और केंद्रीय एजेंसियों के मनोबल पर असर पड़ा।
इस पर कपिल सिब्बल ने पलटवार करते हुए कहा कि ईडी चुनाव से पहले आई-पैक कार्यालय क्यों पहुंची, यह अपने आप में सवाल है। उन्होंने कहा कि आई-पैक के पास चुनाव से जुड़ा संवेदनशील डेटा होता है और एजेंसी को यह जानकारी थी। ऐसे समय में कार्रवाई करना राजनीतिक पूर्वाग्रह को दर्शाता है।
सिब्बल ने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा किसी भी तरह की फाइल चोरी या जब्ती के आरोप निराधार हैं और एजेंसी के अपने दस्तावेज इससे उलट तथ्य दर्शाते हैं। उन्होंने अदालत से कहा कि मामले की सुनवाई उच्च न्यायालय के अधिकार क्षेत्र में आती है और सीधे सुप्रीम कोर्ट में लाना उचित नहीं है।
दोनों पक्षों की दलीलों के दौरान न्यायालय ने कई सवाल उठाए और संयम बनाए रखने की सलाह दी। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी तथ्यों और दस्तावेजों पर विचार करने की बात कही। मामले में आगे की सुनवाई जारी रहने की संभावना है।
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