बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में आरटीआई से जुड़ी जनहित याचिका समेत अन्य मामलों की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने बताया कि स्कूल में बच्चों से पुताई करवाने वाली प्राचार्या को पद से हटा दिया गया है। वहीं हाईकोर्ट ने सरकार से यह भी पूछा है कि चालू सत्र में आरटीई के तहत आरक्षित सीटों की संख्या 85 हजार से घटाकर 30 हजार कैसे कर दी गई। अदालत ने इस संबंध में स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव को व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 24 मार्च को होगी।
यह सुनवाई चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच में हुई। मीडिया में प्रकाशित खबर का संज्ञान लेते हुए कोर्ट ने पहले ही स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव से शपथ पत्र मांगा था।
प्राचार्या को हटाया गया
सरकार की ओर से पेश हलफनामे में बताया गया कि सूरजपुर के तिलसिवा स्थित डीएवी मुख्यमंत्री पब्लिक स्कूल की प्राचार्या विधु शर्मा को तत्काल प्रभाव से पद से हटा दिया गया है। उनकी जगह सुनील महाजन को अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। जांच में पाया गया कि प्राचार्या का व्यवहार पालकों के प्रति बेहद रूखा था। साथ ही यह भी सामने आया कि वे बिना अनुमति के स्कूल परिसर में रह रही थीं और उनके पति का भी वहां आना-जाना रहता था।
दुर्ग में आरटीई शिकायतें लंबित
सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि दुर्ग जिले में आरटीई के तहत 172 ऑफलाइन शिकायतों में से केवल 54 का ही निराकरण हुआ है, जबकि 118 शिकायतें अब भी लंबित हैं। हाईकोर्ट ने दुर्ग के जिला शिक्षा अधिकारी को इन मामलों का दो सप्ताह के भीतर निराकरण करने का आदेश दिया है।
बिना मान्यता के विज्ञापन पर नोटिस
रायपुर के एक निजी स्कूल द्वारा बिना आवश्यक मान्यता के प्रवेश विज्ञापन जारी करने के मामले में भी हाईकोर्ट ने उसे नया पक्षकार बनाते हुए नोटिस जारी किया है।
पहली कक्षा तक ही आरक्षण पर सवाल
सुनवाई के दौरान एक अन्य याचिका में राज्य सरकार के उस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसमें आरटीई के तहत 25% आरक्षण को केवल पहली कक्षा तक सीमित कर दिया गया है, जबकि नर्सरी और केजी को इससे बाहर रखा गया है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि यह कानून का उल्लंघन है और राजस्थान हाईकोर्ट भी इसी तरह के प्रतिबंध को पहले असंवैधानिक ठहरा चुका है।
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