अविभाजित मध्य प्रदेश के रायपुर शहर में एक घटना घटी थी।एक महिला चिकित्सक की मौत हुई थी। मौत भी ऐसे कि महिला ने अपने भोपाल स्थित घर में खबर की थी कि उसके साथ कुछ भी हादसा हो सकता है। पिता, सिर के बल रायपुर आए। आकर सोचे कि समाज वालो को लेकर दूसरे दिन जायेंगे।दूसरे दिन पहुंचे तो देर हो चुकी थी। महिला चिकित्सक की मौत हो चुकी थी। मामला पुलिस तक गया और मृत महिला चिकित्सक के पति और सास गिरफ्तार हो गए। ये परिवार किसी और का नहीं नान घोटाले के दो प्रमुख आरोपी में से एक आलोक शुक्ला का था।
बताया जाता है कि अपने पहुंच का दुरुपयोग कर एक महिला की हत्या को आत्म हत्या का जामा पहनाने की कोशिश हुई थी। ये घटना को बीते सालों हो गए लेकिन एक बदनसीब बाप की आह देर सबेर लगनी ही थी लग गई। सेवा निवृत होने के बाद ईडी, आर्थिक अपराध अनुसंधान शाखा में हिरासत के बाद सेंट्रल जेल में जाना पड़ेगा, आलोक शुक्ला को। ईमानदारी का चोला पहन कर आलोक शुक्ला ने स्वांग खूब रचा। खाद्य सचिव पद पर रहते हुए राशन दुकानों में एक सौ दस फीसदी राशन पहुंचाने का खेल खेला। फर्जी राशन कार्ड बनवाए।
नान में मुख्य कार्य पालन अधिकारी रहते हुए अनिल टुटेजा के जरिए राइस मिलो से घटिया चांवल लेकर गरीब जनता को परोसा। बदले में मिले पैसे को शंकर नगर के एक अस्पताल के माध्यम से अपने लिए रखवाए। दिल्ली में करोड़ो का घर खरीदा। 2015 में घोटाले के बाद दिल्ली के घर में लगे करोड़ो रुपए को एक नंबर पर लाने के लिए बैक डेट से लोन लेने की असफल कोशिश की।
कांग्रेस की सरकार बनी तो अनिल टुटेजा एंड कंपनी बन गए। खूब मलाई खाए।ये जरूर रहा कि अनिल टुटेजा से दूर रहकर एकला चले। सेवा निवृत्त होने के बाद संविदा नियुक्ति पा गए।पत्नी को खादी बोर्ड का अध्यक्ष बनवा लिए। अपनी कंपनी की पुस्तक ” किल्लोल” को प्रदेश में बिकवा लिए। तीन साल की संविदा नियुक्ति से भाजपा के सरकार में आने के बाद बर्खास्त किए जाने के पहले ही इस्तीफा देकर आलोक शुक्ला विदा हो गए थे।
सर्वोच्च न्यायालय के आदेश अनुसार अग्रिम जमानत याचिका खारिज हो गई है। न्यायालय ने आलोक शुक्ला को हिरासत और जेल में रहने की अवधि भी घोषित कर दी है। सालों बाद अनिल टुटेजा से आलोक शुक्ला जेल में मिलेंगे बंदी बनकर। शुक्ला जी, दूसरों के घर में पत्थर बहुत फेंके है, आपका घर भी कांच का ही निकला।
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