तुर्कमान गेट हिंसा मामले में आरोपी उबैदुल्लाह को मिली सशर्त जमानत, कोर्ट ने कहीं ये बातें

दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट ने चांदनी महल थाना क्षेत्र के एक मामले में आरोपी मोहम्मद उबैदुल्लाह को नियमित जमानत दे दी है. यह आदेश एडिशनल सेशन जज जोगिंदर प्रकाश नाहर ने सुनाया. मामला एफआईआर संख्या 17/2026 से जुड़ा है, जिसमें भारतीय न्याय संहिता की कई गंभीर धाराएं और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया गया था. तीस हजारी कोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि आरोपी तुर्कमान गेट, दिल्ली का रहने वाला है और घटना स्थल उसके घर से महज 50 मीटर की दूरी पर है. बचाव पक्ष की दलील थी कि आरोपी का घटना में कोई सीधा रोल नहीं है और पुलिस द्वारा जो फोटो पेश की गई है, उसमें आरोपी सिर्फ अपने घर के पास खड़ा दिखाई देता है जो स्वाभाविक है.

दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट ने मोहम्मद उबैदुल्लाह को जमानत दी. कोर्ट ने माना कि आरोपी के खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं है और वह परिवार का एकमात्र कमाने वाला सदस्य है. इसके अलावा, आरोपी के खिलाफ कोई वीडियो सबूत या कॉल डिटेल रिकॉर्ड भी पेश नहीं किया गया जिससे उसकी संलिप्तता साबित हो सके.

तीस हजारी कोर्ट ने आरोपी को जमानत देते हुए कई सख्त शर्तें भी लगाईं गईं. कोर्ट ने अपने आदेश में कहा आरोपी को नियमित रूप से कोर्ट में पेश होना होगा जांच में पूरा सहयोग करना होगा, किसी भी गवाह को प्रभावित नहीं करेगा और बिना अनुमति देश से बाहर नहीं जाएगा. इसके अलावा आरोपी को पीड़ित/शिकायतकर्ता के घर से 50 मीटर के दायरे में जाने से भी रोक दिया गया है.

कोर्ट ने आरोपी को 25 हजार रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि की एक जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया. दिल्ली पुलिस ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि मामला गंभीर धाराओं से जुड़ा है, लेकिन यह भी स्वीकार किया गया कि इस समय आरोपी की पुलिस हिरासत की जरूरत नहीं है.

तीस हजारी कोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि आरोपी अपने परिवार का एकमात्र कमाने वाला सदस्य है. उसके पिता पैरालिसिस से पीड़ित हैं और उनकी देखभाल की पूरी जिम्मेदारी आरोपी पर ही है. आरोपी 8 जनवरी 2026 से न्यायिक हिरासत में था.

तीस हजारी कोर्ट ने सभी दलीलों को सुनने के बाद यह माना कि जमानत अर्जी इस अदालत में सुनवाई योग्य है और मामले के तथ्यों को देखते हुए आरोपी को जमानत दी जा सकती है. कोर्ट ने साफ किया कि यह आदेश मामले के मेरिट पर कोई राय नहीं है.

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