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भूपेश का भोपू और आपातकाल

छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना के बाद जनता ने दो कांग्रेसी मुख्यमंत्री का कार्यकाल देखा। बीच में भाजपा के एक मुख्यमंत्री का भी काल देखा। कांग्रेस के दो मुख्यमंत्री का कार्यकाल कुल जमा साढ़े सात साल रहा।भाजपा के एक मुख्यमंत्री का कार्यकाल कांग्रेस के दो मुख्यमंत्री के कार्यकाल का दुगुना रहा। डा रमन सिंह,अजीत जोगी और भूपेश बघेल पर भारी ही पड़े। भूपेश बघेल ,राज्य में पंद्रह साल बाद कांग्रेस को लाए थे। चाहते तो डा रमन सिंह से सीख सकते थे लेकिन निकले जोगी के बाप। जोगी, प्रशासनिक अधिकारी रहे थे इस कारण अपने ही पार्टी के लोगों को कही का नहीं रखा था।

भूपेश बघेल इससे ज्यादा क्रूर निकले। चांडाल चौकड़ी की मदद से राज्य में अघोषित आपातकाल लगा दिया। सरकार का सच बताने वाले प्रेस को दबाने के लिए पुलिस वाला गुंडा ले आए। पांच साल के कांग्रेस शासनकाल में भ्रष्ट अनिल टुटेजा, रानू साहू, समीर विश्नोई, निरंजन दास, सौम्या चौरसिया सहित सूर्यकान तिवारी, रोशन चंद्राकर का नाम उनकी गलत हरकतों के कारण छप नहीं सकता था हा, समर्थन में जन संपर्क संचालनालय ब्यूटी पार्लर का काम जरूर करता था।

व्यापारियों और अधिकारियों को लूटने के लिए भी आईपीएस नियुक्त हो गए। एक सीएसपी अभिषेक माहेश्वरी तो अधिकृत दलाल बना हुआ था। महादेव सट्टा में पुलिस विभाग के आईपीएस ही रुपया बटोर रहे थे। ये सभी केंद्रीय जांच एजेंसी के जांच के दायरे में है। ऐसे ही कुशासन के परवरदिगार बता रहे है कि देश में अघोषित आपातकाल लगा हुआ है।ये पता नहीं कब खत्म होगा। मतलब साफ है कि कांग्रेस की भाजपा से सामना करने की शक्ति खत्म होते जा रही है। अनेक राज्यों में कांग्रेस कब सत्ता में रही इतिहास खंगालने का विषय हो गया है। पिछले तीन लोकसभा चुनाव में दहाई की संख्या पार नहीं कर पाए है। अगर अघोषित आपातकाल लगा होता तो कांग्रेस को सत्ता में आ जाना था।

भूपेश बघेल ने इंदिरा गांधी द्वारा आपातकाल लगाने की बात कही लेकिन ये नहीं बताया कि बिना कैबिनेट से अनुमोदन लिए नियम विपरीत आपातकाल लगाया था। न्यायालय से चुनाव में अयोग्य ठहराये जाने पर डरी हुई इंदिरा गांधी ने सत्ता में बने रहने के लिए लोकसभा का कार्यकाल पांच साल से बढ़ा कर छह साल कर दिया था। अगर आपातकाल का निर्णय सही था तो सत्ता में वापसी होना था। खुद प्रधानमंत्री ही चुनाव हार गई थी। पार्टी सत्ता से बाहर हो गई थी।

आपातकाल को सही ठहराने वाले भूपेश बघेल ने छत्तीसगढ़ में दहशत का माहौल बना कर आपातकाल लगाया था। लूट ,घोटाले के कीर्तिमान बनाए, नतीजा सामने है । जिस प्रेस में अनिल टुटेजा रानू साहू सौम्या चौरसिया, सूर्यकांत तिवारी के नाम नहीं छपते थे।एक पुलिस वाले गुंडे के घर जांच एजेंसी ने छापा मारा उस अधिकारी का नाम चाकूबाजी में पकड़ाए जाने वाले आरोपी के समान बिना सरनेम के छपा था। प्रेस में ऐसी सेंसरशिप, 1975के आपातकाल का छत्तीसगढ़ में दोहराव था। सत्ता में कांग्रेस के होने पर विपक्ष को कैसे दबाया गया था।भूपेश बघेल भूल गए है।

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