‘लॉरेंस ऑफ पंजाब’ की रिलीज पर दिल्ली हाईकोर्ट ने सुनवाई की बंद, जानें क्या है वजह?

नई दिल्ली: गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई (Gangster Lawrence Bishnoi) की उस याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने सुनवाई बंद कर दी है, जिसमें उन्होंने OTT प्लेटफॉर्म पर प्रस्तावित सीरीज “लॉरेंस ऑफ पंजाब” की रिलीज पर रोक लगाने की मांग की थी। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय पहले ही सुरक्षा कारणों के चलते इस सीरीज को रिलीज न करने की सलाह दे चुका है, ऐसे में इस मामले में आगे हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं बचती। सुनवाई के दौरान बिश्नोई की ओर से पेश वकील ने यह आशंका जताई कि यदि सीरीज के किरदारों के नाम बदलकर इसे रिलीज किया गया, तो इससे फिर से कानूनी मदद ले सकते हैं।

यह आदेश जस्टिस पुरुषेंद्र कुमार कौरव की पीठ ने दिया। कोर्ट ने कहा कि सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की ओर से ओटीटी प्लेटफॉर्म को डॉक्यूसीरीज रिलीज न करने की सलाह दिए जाने के बाद अब मामले में आगे कुछ भी शेष नहीं बचा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि जब तक केंद्र सरकार की इस सलाह को औपचारिक रूप से वापस नहीं लिया जाता, तब तक निर्माताओं के लिए इस डॉक्यूसीरीज को रिलीज करना संभव नहीं दिखता। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता पक्ष ने यह भी आशंका जताई कि भविष्य में किरदारों के नाम बदलकर सामग्री को रिलीज किया जा सकता है, जिससे फिर से विवाद पैदा हो सकता है। हालांकि कोर्ट ने कहा कि ऐसी स्थिति में याचिकाकर्ता दोबारा कानूनी प्रक्रिया का सहारा ले सकते हैं।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने आशंका जताई कि यह डॉक्यूसीरीज किसी अन्य रूप में या बदले हुए स्वरूप में रिलीज की जा सकती है, जिससे विवाद दोबारा पैदा हो सकता है। इस पर जस्टिस पुरुषेंद्र कुमार कौरव की पीठ ने स्पष्ट किया कि मौजूदा स्थिति में मामला आगे बढ़ाने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय पहले ही ओटीटी प्लेटफॉर्म को इसे रिलीज न करने की सलाह दे चुका है।

OTT प्लेटफॉर्म की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा 23 और 24 अप्रैल को जारी की गई तीन सलाहों को वे सक्षम अधिकार क्षेत्र वाली अदालत में चुनौती दे रहे हैं। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि मौजूदा याचिका इस पीठ के समक्ष सुनवाई योग्य नहीं है, क्योंकि इसमें क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र (jurisdiction) का मुद्दा शामिल है। यह मामला उस समय चर्चा में आया जब डॉक्यूसीरीज की संभावित रिलीज को लेकर कानूनी विवाद खड़ा हुआ और मंत्रालय की सलाह के बाद इसके प्रसारण पर रोक जैसी स्थिति बन गई।

अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि वे पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की एडवाइजरी को चुनौती देने की प्रक्रिया में हैं। उनका कहना था कि यह सलाह पंजाब पुलिस से मिले इनपुट पर आधारित है, इसलिए इसे कानूनी रूप से चुनौती दी जा रही है। इस मामले में यह भी बताया गया कि 33 वर्षीय लॉरेंस बिश्नोई, जो फिलहाल गुजरात की जेल में बंद है, कई आपराधिक मामलों का सामना कर रहा है। वह पंजाबी सिंगर सिद्धू मूसेवाला की हत्या मामले में भी मुख्य आरोपियों में शामिल है।

पहले पंजाब पुलिस ने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर ओटीटी प्लेटफॉर्म Zee5 पर इस तरह की डॉक्यूसीरीज को प्रसारित न करने के निर्देश देने की अपील की थी। पुलिस का तर्क था कि इस तरह की सामग्री के रिलीज होने से कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक सुरक्षा को गंभीर खतरा हो सकता है। याचिकाकर्ता पक्ष का भी कहना है कि इस डॉक्यूसीरीज की रिलीज से संवेदनशील स्थिति उत्पन्न हो सकती है, इसलिए इसे प्रसारित नहीं किया जाना चाहिए।

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