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शेख हसीना के खिलाफ आरोपों पर आज फैसला सुनाएगा इंटरनेशनल क्राइम ट्रिब्यूनल, सजा-ए-मौत की मांग

बांग्लादेश का इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल (ICT) 17 नवंबर को पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के खिलाफ आरोपों में फैसले का ऐलान करेगा. इससे पहले बांग्लादेश में सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं. हसीना पर मानवता के खिलाफ अपराध और हत्या जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं. 78 साल की हसीना, पूर्व गृह मंत्री आसादुज्जमान खान कमाल और तत्कालीन पुलिस महानिरीक्षक (IGP) चौधरी अब्दुल्ला अल-मामुन पर पांच आरोप लगाए गए हैं.

पहला आरोप हत्या, हत्या का प्रयास, यातना और अन्य अमानवीय कृत्यों से जुड़ा है. दूसरा आरोप हसीना पर प्रदर्शनकारियों को खत्म करने का आदेश देने का है. तीसरा आरोप छात्रों पर घातक हथियारों का इस्तेमाल करने का निर्देश देने और भड़काऊ भाषण देने का है. बाकी आरोपों में छह निहत्थे प्रदर्शनकारियों की हत्या और गोलीबारी का जिक्र है.

हसीना को सजा-ए-मौत देने की मांग
हसीना के लिए सजा-ए-मौत की मांग की गई है. आरोप है कि हसीना पिछले साल हुए विरोध प्रदर्शनों के अपराधों की मास्टरमाइंड थीं. हालांकि हसीना के समर्थक इस मामले को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताते हैं. फिलहाल अवामी लीग के ज्यादातर नेता जेल में हैं या फरार हैं.

ट्रिब्यूनल में हसीना और कमाल की अनुपस्थिति में उनको दोषी माना और उन्हें भगोड़ा घोषित किया गया. IGP ममुन ने सरकारी गवाह बन गए थे. संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय की रिपोर्ट के मुताबिक, 15 जुलाई से 15 अगस्त 2024 के बीच बांग्लादेश में हुई हिंसा में करीब 1,400 लोग मारे गए. इस दौरान हसीना सरकार ने विरोध प्रदर्शनों को दबाने के लिए सुरक्षा बलों का इस्तेमाल किया.

23 अक्टूबर को सुनवाई पूरी हुई
ट्रिब्यूनल ने 23 अक्टूबर को अपनी सुनवाई पूरी की. अगस्त में हुए विद्रोह में अवामी लीग सरकार गिरा दी गई थी और हसीना देश छोड़कर भारत चली गईं. कमाल ने भी भारत में शरण ली है. मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने हसीना की प्रत्यर्पण की मांग की है, लेकिन भारत ने अभी तक कोई जवाब नहीं दिया.

हाल ही में हसीना ने बांग्लादेश की इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल (ICT) को कंगारू कोर्ट करार दिया और कहा कि इसे उनके राजनीतिक विरोधियों से जुड़े पुरुष चला रहे हैं. अवामी लीग ने हेग स्थित ICC में यूनुस सरकार के खिलाफ मानवता के खिलाफ अपराधों, हत्याओं और मनमाने गिरफ्तारियों का आरोप लगाया है.

हसीना ने ट्रिब्यूनल की स्थापना की थी
इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल (ICT) की स्थापना खुद शेख हसीना ने 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के दौरान हुए युद्ध अपराधों की जांच के लिए की थी. हसीना के कार्यकाल में इस अदालत ने जमात-ए-इस्लामी के कई नेताओं को सजा दी थी. अब इसी अदालत में अंतरिम सरकार ने हसीना के खिलाफ केस चलाया है. गवाहियों की सुनवाई पूरी हो चुकी है.

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